विश्व वर्षा दिवस पर संतों संग योग, मुमुक्षु भवन में हुआ वृहद पौधारोपण
वाराणसी। विश्व वर्षा दिवस के अवसर पर मुमुक्षु भवन परिसर में योग और पौधारोपण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। पर्यावरण ऋषि अनिल कुमार सिंह के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में संतजनों, समाजसेवियों और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने सहभागिता करते हुए परिसर को हराभरा बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का आयोजन भारत विकास परिषद, सृजन सामाजिक विकास न्यास और हिंदू आध्यात्मिक सेवा संस्थान के सहयोग से किया गया।
संतों के साथ किया योग, दिया स्वस्थ जीवन का संदेश
कार्यक्रम की शुरुआत मुमुक्षु भवन सभागार में संतजनों के साथ सामूहिक योगाभ्यास से हुई। योग के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखने का संदेश दिया गया। प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने पर जोर दिया।
परिसर को हराभरा बनाने के लिए लगाए गए विभिन्न प्रजातियों के पौधे
योग सत्र के बाद मुमुक्षु भवन परिसर में वृहद पौधारोपण अभियान चलाया गया। इस दौरान सावन, गंधराज, स्वर्णचंपा, एक्जोरा और चांदनी सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए। आयोजकों ने बताया कि इन पौधों से परिसर की सुंदरता बढ़ने के साथ-साथ वातावरण भी अधिक शुद्ध और मनमोहक बनेगा।
वृद्धजनों को मिलेगा प्राकृतिक वातावरण का लाभ
पर्यावरण ऋषि अनिल कुमार सिंह ने कहा कि मुमुक्षु भवन में देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में वृद्धजन मोक्ष की कामना लेकर आते हैं। ऐसे में हरियाली से भरपूर और शांत वातावरण उनके लिए मानसिक शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत बनेगा। उन्होंने कहा कि यहां आने वाले लोग पौधों को आशीर्वाद स्वरूप संरक्षित करने का भी कार्य करेंगे।
संरक्षण का लिया संकल्प
कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखना भी सामूहिक जिम्मेदारी है। इस अवसर पर ‘स्वच्छ काशी, सुंदर काशी, हरित काशी’ का संदेश देते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए जनभागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया गया।
बड़ी संख्या में लोग रहे उपस्थित
कार्यक्रम में सृजन सामाजिक विकास न्यास के उपाध्यक्ष मदन राम चौरसिया, कौशल पति शर्मा, मनोज कुमार, अर्चना अग्रवाल, विशाल पटेल तथा मुमुक्षु भवन के प्रबंधक काबरा अपनी टीम के साथ मौजूद रहे। संतजनों, समाजसेवियों और अन्य प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए ऐसे कार्यक्रमों को लगातार आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।