वाराणसी : टिकरी में श्री अन्न प्रसंस्करण इकाई शुरू, किसानों को मिलेंगे आय बढ़ाने के नए अवसर

रोहनिया थाना क्षेत्र के टिकरी गांव स्थित कृषक उत्पादक संगठन एवं औद्यानिक विपणन सहकारी समिति लिमिटेड परिसर में श्री अन्न (मिलेट) प्रसंस्करण इकाई का शुभारंभ किया गया। कृषि विभाग के प्रमुख सचिव एवं वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. एमके शन्मुगा सुन्दरम ने फीता काटकर इकाई का लोकार्पण किया। इस पहल को किसानों को श्री अन्न आधारित उत्पादों के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
 

वाराणसी। रोहनिया थाना क्षेत्र के टिकरी गांव स्थित कृषक उत्पादक संगठन एवं औद्यानिक विपणन सहकारी समिति लिमिटेड परिसर में श्री अन्न (मिलेट) प्रसंस्करण इकाई का शुभारंभ किया गया। कृषि विभाग के प्रमुख सचिव एवं वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. एमके शन्मुगा सुन्दरम ने फीता काटकर इकाई का लोकार्पण किया। इस पहल को किसानों को श्री अन्न आधारित उत्पादों के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कार्यक्रम में संयुक्त कृषि निदेशक शैलेन्द्र कुमार और उप कृषि निदेशक अमित कुमार जायसवाल भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने कहा कि प्रसंस्करण इकाई के शुरू होने से स्थानीय किसानों और कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) के सदस्यों को श्री अन्न से जुड़े उत्पाद तैयार करने तथा उनके बेहतर विपणन के अवसर मिलेंगे। इससे कृषि उत्पादों का मूल्य बढ़ने के साथ किसानों की आमदनी में वृद्धि और ग्रामीण स्तर पर रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा।

लोकार्पण के बाद प्रमुख सचिव ने एफपीओ परिसर में संचालित डेयरी फार्म का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने गिर, साहीवाल और थारपारकर जैसी उन्नत देशी गोवंशीय नस्लों को देखा और डेयरी की गतिविधियों की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र का भ्रमण किया। यहां किसानों और कृषि विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही प्रशिक्षण सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की।

एफपीओ के निदेशक अमित सिंह ने प्रमुख सचिव को संगठन की विभिन्न गतिविधियों, कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण, विपणन, डेयरी संचालन और किसानों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं से अवगत कराया। अधिकारियों ने परिसर स्थित कोल्ड स्टोरेज का भी निरीक्षण किया और भंडारण व्यवस्था की जानकारी ली। इस अवसर पर उम्मीद जताई गई कि नई प्रसंस्करण इकाई से श्री अन्न आधारित कृषि उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही किसानों को स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण और विपणन की सुविधा मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।