वाराणसी : भक्तों ने मां को दी विदाई, कुंडो-तालाबों में विसर्जित हुईं दुर्गा प्रतिमाएं, गूंजे जयकारे
वाराणसी। विजयादशमी के बाद काशी में मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला जारी रहा। बुधवार को शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा को विदाई दी। भेलूपुर, सरायनंदन, खोजवा, दुर्गाकुंड, लंका, छित्तुपुर, सुसुवाही और नसीरपुर सहित सीर गोवर्धनपुर तथा आसपास के ग्रामीण इलाकों में प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। इस दौरान जगह-जगह डीजे की धुन पर नाचते-गाते श्रद्धालु मां के जयकारे लगाते हुए विसर्जन यात्रा में शामिल हुए। पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना रहा।
शहर से लेकर गांवों तक विभिन्न पूजा समितियों की ओर से स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमाओं को आकर्षक ढंग से सजाए गए वाहनों पर रखकर विसर्जन स्थलों तक ले जाया गया। प्रतिमाओं के साथ पूजा समितियों के सदस्य, महिलाएं, बच्चे और बड़ी संख्या में श्रद्धालु चल रहे थे। मां के जयकारों से गलियां और रास्ते गूंज उठे। युवा डीजे की धुन पर झूमते नजर आए, वहीं महिलाएं और बच्चे भी उत्साह के साथ विसर्जन यात्रा में शामिल हुए।
भेलूपुर, सरायनंदन, खोजवा और दुर्गाकुंड में प्रतिमा विसर्जन को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह दिखाई दिया। वहीं, लंका, छित्तुपुर, सुसुवाही और नसीरपुर में भी प्रतिमाओं को वाहनों पर रखकर विसर्जन स्थलों तक पहुंचाया गया। सीर गोवर्धनपुर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों ने पारंपरिक श्रद्धा और उत्साह के साथ मां को विदाई दी। विसर्जन यात्राओं के दौरान जगह-जगह श्रद्धालु मां के जयकारे लगाते रहे।
कुंड, तालाबों और सरोवरों में हुआ विसर्जन
श्रद्धालुओं ने निर्धारित कुंडों, तालाबों और सरोवरों में विधि-विधान के साथ मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया। विसर्जन से पहले लोगों ने मां के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और शांति की कामना की। इसके बाद जयकारों के बीच प्रतिमाओं को जल में विसर्जित किया गया। इस दौरान कई श्रद्धालु भावुक नजर आए और नम आंखों से मां को अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना के साथ विदाई दी।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्क रहा पुलिस प्रशासन
प्रतिमा विसर्जन के दौरान शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन सतर्क रहा। विभिन्न क्षेत्रों में पुलिसकर्मी निगरानी करते नजर आए, ताकि विसर्जन यात्राओं के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न होने पाए। मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ ही पूजा समितियों और श्रद्धालुओं के नौ दिनों तक चले धार्मिक उत्सव का समापन हुआ।