राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल ने चार सूत्री मांगों को लेकर निकाली पदयात्रा, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल की ओर से पिछड़ा वर्ग एवं मुस्लिम दलित जातियों के जागरूकता अभियान के तहत परमवीर चक्र विजेता शहीद अब्दुल हमीद की 61वीं पुण्यतिथि मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुस्लिम दलित और अति पिछड़ी जातियों की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक एवं राजनीतिक स्थिति में सुधार के लिए अरजाल आयोग गठित करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि इन समुदायों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उनकी समस्याओं का अध्ययन कर ठोस नीतियां बनाई जानी जरूरी हैं।
 

वाराणसी। राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल की ओर से पिछड़ा वर्ग एवं मुस्लिम दलित जातियों के जागरूकता अभियान के तहत परमवीर चक्र विजेता शहीद अब्दुल हमीद की 61वीं पुण्यतिथि मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुस्लिम दलित और अति पिछड़ी जातियों की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक एवं राजनीतिक स्थिति में सुधार के लिए अरजाल आयोग गठित करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि इन समुदायों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उनकी समस्याओं का अध्ययन कर ठोस नीतियां बनाई जानी जरूरी हैं।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के प्रदेश अध्यक्ष यूथ नुरुल हुदा ने कहा कि 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में शहीद अब्दुल हमीद ने देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। उन्होंने कहा कि जिस समाज से शहीद अब्दुल हमीद आते थे, वह समाज आज भी सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन से जूझ रहा है। ऐसे में उनके संघर्ष और बलिदान को याद करते हुए वंचित समुदायों के अधिकार और विकास की दिशा में प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।

नुरुल हुदा ने कहा कि मुस्लिम पमरिया/पवरिया, मुस्लिम माली, गौरी, भट्ट, नट सहित कई जातियों की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और राजनीतिक स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि इन जातियों की वास्तविक स्थिति का अध्ययन और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए अरजाल आयोग का गठन किया जाना चाहिए।

उन्होंने मांग की कि पिछड़ा वर्ग की सूची में शामिल होने से छूटी मुस्लिम पमरिया/पवरिया समेत अन्य पात्र जातियों को उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग की अनुमन्य सूची में शामिल किया जाए। उन्होंने मंडल कमीशन, रंगनाथ मिश्रा आयोग, सच्चर कमेटी, काका कालेलकर आयोग और रोहिणी आयोग की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि इन रिपोर्टों में पिछड़े और वंचित वर्गों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास पर जोर दिया गया है।

चार प्रमुख मांगों को लेकर ज्ञापन
नुरुल हुदा ने केंद्र और प्रदेश सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखीं। इनमें संविधान के अनुच्छेद 341(3) में धार्मिक प्रतिबंध हटाना, मुस्लिम दलित जातियों के शैक्षणिक, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक विकास के लिए अरजाल आयोग का गठन, मुस्लिम पमरिया/पवरिया समेत छूटी हुई जातियों को उत्तर प्रदेश की ओबीसी सूची में शामिल करना और बिहार की तर्ज पर उत्तर प्रदेश की अन्य पिछड़ा वर्ग सूची में कर्पूरी फार्मूला लागू करना शामिल है।

उन्होंने कहा कि आजादी के दशकों बाद भी अति पिछड़ी एवं मुस्लिम दलित जातियों की राजनीतिक भागीदारी बेहद कम है। सत्ता और शासन में उनकी उचित भागीदारी सुनिश्चित किए बिना सामाजिक न्याय का लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता। कार्यक्रम के बाद कार्यकर्ताओं ने पदयात्रा निकाली। इसके बाद जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर चारों मांगों को पूरा करने की अपील की गई।