शंकुधारा पोखर का मुख्य गेट गिरा, रखरखाव और निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल

काशी की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों में शामिल शंकुधारा पोखर एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह इसके सौंदर्यीकरण कार्य में संभावित खामियां और रखरखाव की कमी है। मंगलवार को पोखर परिसर का मुख्य लोहे का गेट अचानक भरभराकर गिर पड़ा। हालांकि घटना के समय वहां कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गेट के आसपास श्रद्धालु या राहगीर मौजूद होते तो गंभीर दुर्घटना हो सकती थी।
 

वाराणसी। काशी की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों में शामिल शंकुधारा पोखर एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह इसके सौंदर्यीकरण कार्य में संभावित खामियां और रखरखाव की कमी है। मंगलवार को पोखर परिसर का मुख्य लोहे का गेट अचानक भरभराकर गिर पड़ा। हालांकि घटना के समय वहां कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गेट के आसपास श्रद्धालु या राहगीर मौजूद होते तो गंभीर दुर्घटना हो सकती थी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर शंकुधारा पोखर के सुंदरीकरण के लिए लगभग 19 लाख रुपये खर्च किए गए थे। परियोजना के तहत पोखर परिसर में लोहे की रेलिंग, आकर्षक प्रवेश द्वार, बैठने की व्यवस्था तथा अन्य सौंदर्यीकरण संबंधी कार्य कराए गए थे। उद्देश्य इस ऐतिहासिक स्थल को सुरक्षित और आकर्षक बनाना था, लेकिन हालिया घटना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और उसके बाद हुए रखरखाव पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

स्थानीय समाजसेवी गुड्डू ने बताया कि सुंदरीकरण के बाद प्रारंभिक दिनों में व्यवस्थाएं बेहतर दिखाई दीं, लेकिन समय बीतने के साथ रखरखाव की अनदेखी सामने आने लगी। उनके अनुसार गिरे हुए गेट का निरीक्षण करने पर प्रतीत होता है कि उसकी वेल्डिंग पर्याप्त मजबूत नहीं थी। इसी कारण गेट अपने भार को संभाल नहीं सका और अचानक गिर गया।

उन्होंने कहा कि यह केवल संयोग था कि घटना के समय कोई व्यक्ति गेट की चपेट में नहीं आया। यदि कोई श्रद्धालु, बुजुर्ग या बच्चा वहां मौजूद होता तो गंभीर चोट लग सकती थी। इस घटना ने परिसर में लगे अन्य गेटों और लोहे की रेलिंगों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।

शंकुधारा पोखर केवल एक जलाशय नहीं, बल्कि काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है। परिसर में भगवान द्वारकाधीश का प्राचीन मंदिर स्थित है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजन के लिए पहुंचते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार प्राचीन समय में इस पोखर के जल में स्नान का विशेष धार्मिक महत्व था और इसे कई रोगों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता था।

क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि किसी भी ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण केवल उसके सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं होना चाहिए। नियमित सफाई, सुरक्षा व्यवस्था, तकनीकी निरीक्षण और संरचनाओं के रखरखाव पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है। उनका आरोप है कि देखरेख के अभाव में पोखर परिसर की कई व्यवस्थाएं धीरे-धीरे जर्जर होती जा रही हैं।

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने नगर निगम और संबंधित विभागों से पूरे परिसर का सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की है। साथ ही गिरे हुए गेट की तत्काल मरम्मत और अन्य संरचनाओं की तकनीकी जांच कर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई करने की अपील की है। नागरिकों का मानना है कि समय रहते खामियों को दूर नहीं किया गया तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है। फिलहाल गेट गिरने की घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।