काकोरी के अमर बलिदानियों की गाथा से गूंजा सर्किट हाउस, शहीदों को नमन, स्कूली बच्चों ने जाना स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास

हर घर तिरंगा अभियान के तहत शनिवार को सर्किट हाउस परिसर में राष्ट्रभक्ति और इतिहास की झलक एक साथ देखने को मिली। काकोरी ट्रेन एक्शन की 101वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर यहां ऐतिहासिक प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ नई पीढ़ी को उनके संघर्ष, त्याग और राष्ट्रप्रेम से परिचित कराया गया।
 

वाराणसी। हर घर तिरंगा अभियान के तहत शनिवार को सर्किट हाउस परिसर में राष्ट्रभक्ति और इतिहास की झलक एक साथ देखने को मिली। काकोरी ट्रेन एक्शन की 101वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर यहां ऐतिहासिक प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ नई पीढ़ी को उनके संघर्ष, त्याग और राष्ट्रप्रेम से परिचित कराया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख क्रांतिकारियों के चित्रों पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, विद्यार्थियों और नागरिकों ने शहीद राजेंद्रनाथ लाहिड़ी, अशफाकउल्लाह खां, रामप्रसाद बिस्मिल और ठाकुर रोशन सिंह समेत अन्य क्रांतिकारियों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। उपस्थित लोगों ने देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीरों के योगदान को याद किया।

प्रदर्शनी में जीवंत हुई काकोरी क्रांति की कहानी
सर्किट हाउस परिसर में लगाई गई हर घर तिरंगा एवं काकोरी ट्रेन एक्शन पर आधारित प्रदर्शनी कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रही। प्रदर्शनी में काकोरी कांड से जुड़े क्रांतिकारियों के जीवन और स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदर्शित की गईं। प्रदर्शनी में क्रांतिकारियों की जन्म तिथि, जन्म स्थान, शिक्षा-दीक्षा, वैचारिक पृष्ठभूमि, संगठनात्मक भूमिका और स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी सक्रियता का विवरण प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही गिरफ्तारी, मुकदमे की कार्यवाही और ब्रिटिश शासन की ओर से दी गई सजाओं की जानकारी भी लोगों को दी गई।

रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्लाह खां, ठाकुर रोशन सिंह और राजेंद्रनाथ लाहिड़ी को दी गई फांसी की सजा का उल्लेख विशेष रूप से किया गया। इसके अलावा सचिंद्रनाथ सान्याल, गोविंद चरण कर, मुकुंद लाल, सचिंद्रनाथ बक्शी, जोगेश चंद्र चटर्जी और रामकृष्ण खत्री समेत अन्य क्रांतिकारियों के संघर्ष और योगदान को भी प्रदर्शित किया गया।


दुर्लभ दस्तावेजों ने खींचा लोगों का ध्यान
प्रदर्शनी में क्रांतिकारियों के हस्ताक्षरों की प्रतिकृतियां, ऐतिहासिक पत्र, मुकदमे से जुड़े दस्तावेज और दुर्लभ चित्र भी प्रदर्शित किए गए। इन्हें देखने के लिए लोगों की विशेष रुचि रही। युवा और विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी के विभिन्न हिस्सों का अवलोकन कर स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े तथ्यों की जानकारी ली। प्रदर्शनी के एक विशेष खंड में क्रांतिकारियों की शिक्षा, साहित्यिक रुचि, विचारधारा और व्यक्तित्व से जुड़े पहलुओं को भी सामने रखा गया। इसमें बताया गया कि अनेक क्रांतिकारी शिक्षित और साहित्य प्रेमी युवा थे, जिन्होंने व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं की परवाह किए बिना देश की स्वतंत्रता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।

लोकगीतों में गूंजा शहीदों का शौर्य
कार्यक्रम के दौरान आयोजित सांस्कृतिक संध्या ने माहौल को देशभक्ति के रंग से भर दिया। लोकगीत कलाकारों ने स्वतंत्रता संग्राम, क्रांतिकारियों के त्याग और शहीदों की वीरता पर आधारित प्रस्तुतियां दीं। गीतों के माध्यम से काकोरी के वीरों की गाथा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। दर्शकों ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

बच्चों ने जाना आजादी का इतिहास
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राओं ने भी भाग लिया। विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी का भ्रमण कर क्रांतिकारियों के जीवन, संघर्ष और बलिदान के बारे में जानकारी हासिल की। आयोजकों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों और युवाओं को स्वतंत्रता आंदोलन के वास्तविक इतिहास से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने दी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र सिंह, भाजपा जिला अध्यक्ष राम सकल पटेल, भाजपा महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरी और मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षक, समाजसेवी और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। सभी ने शहीदों को नमन करते हुए उनके बलिदान को देश की अमूल्य विरासत बताया। वक्ताओं ने कहा कि 9 अगस्त 1925 का काकोरी ट्रेन एक्शन ब्रिटिश शासन के खिलाफ क्रांतिकारियों की संगठित चुनौती का महत्वपूर्ण अध्याय था। काकोरी की घटना ने स्वतंत्रता आंदोलन में क्रांतिकारी गतिविधियों को नई पहचान दी और युवाओं में राष्ट्र के लिए त्याग की भावना को मजबूत किया।

कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित लोगों ने मौन रखकर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। साथ ही उनके आदर्शों, त्याग और राष्ट्रभक्ति की भावना को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया। हर घर तिरंगा अभियान के तहत आयोजित यह कार्यक्रम स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों को जीवंत करने के साथ राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति का संदेश देने वाला रहा।