बदरीनाथ धाम में हेलीकॉप्टर हादसे पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने जताया दुख, घटना की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की 

बदरीनाथ धाम से दर्शन कर लौट रहे कर्नाटक के छह श्रद्धालुओं की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में हुई असामयिक मृत्यु पर उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने इस हृदयविदारक घटना पर संवेदना जताते हुए दिवंगत आत्माओं की शांति और शोकाकुल परिवारों को इस दुख की घड़ी में धैर्य एवं संबल प्रदान करने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।
 

दुर्घटना की उच्चस्तरीय जांच और हवाई सेवाओं के सुरक्षा मानक सख्त करने पर दिया जोर, बोले- धाम क्षेत्र में डीजे और मनोरंजन कार्यक्रमों पर लगे प्रतिबंध 

वाराणसी। बदरीनाथ धाम से दर्शन कर लौट रहे कर्नाटक के छह श्रद्धालुओं की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में हुई असामयिक मृत्यु पर उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने इस हृदयविदारक घटना पर संवेदना जताते हुए दिवंगत आत्माओं की शांति और शोकाकुल परिवारों को इस दुख की घड़ी में धैर्य एवं संबल प्रदान करने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि तीर्थयात्रा के दौरान इस प्रकार की दुर्घटना अत्यंत दुखद और चिंताजनक है। श्रद्धालु आस्था और विश्वास के साथ देवभूमि पहुंचते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित प्रशासन और सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने उत्तराखंड सरकार से दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

हवाई सेवाओं की सुरक्षा पर उठाए सवाल
उन्होंने कहा कि हेलीकॉप्टर दुर्घटना के पीछे तकनीकी खराबी, प्रतिकूल मौसम या व्यावसायिक दबाव जैसे संभावित कारणों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। जांच में यह भी स्पष्ट किया जाए कि कहीं मौसम संबंधी चेतावनियों की अनदेखी तो नहीं की गई। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए हवाई सेवाओं के सुरक्षा मानकों को और सख्त किया जाए। मौसम की स्थिति और तकनीकी सुरक्षा की पूरी पुष्टि के बाद ही उड़ानों की अनुमति दी जानी चाहिए।

धाम की मर्यादा बनाए रखने पर जोर
शंकराचार्य ने बदरीनाथ धाम की धार्मिक पवित्रता और प्राचीन परंपराओं की रक्षा को भी आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि धाम परिसर और पवित्र यात्रा मार्ग पर डीजे बजाना, नाच-गाना तथा मनोरंजन और व्यावसायिक आयोजनों जैसी गतिविधियां तीर्थस्थल की गरिमा के अनुकूल नहीं हैं। देवभूमि की आध्यात्मिक पहचान और धार्मिक मर्यादा को बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने उत्तराखंड सरकार और मुख्यमंत्री से मांग की कि धाम क्षेत्र में अमर्यादित गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए स्पष्ट और कठोर नीति बनाई जाए। साथ ही धार्मिक परंपराओं, तीर्थस्थल की पवित्रता और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।