बीएचयू में इलेक्ट्रिक बस सेवा पर छात्रों ने उठाए सवाल, निःशुल्क सुविधा और सुरक्षा मानकों की मांग

बीएचयू परिसर में परिवहन विभाग द्वारा शुरू की गई विद्युत बस सेवा को लेकर छात्रों ने अपनी चिंताएं और सुझाव विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष रखे हैं। छात्र नेता आशुतोष सिंह "यीशु" के नेतृत्व में छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कुलसचिव राजन श्रीवास्तव को ज्ञापन सौंपकर बस सेवा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार करने की मांग की।
 

वाराणसी। बीएचयू परिसर में परिवहन विभाग द्वारा शुरू की गई विद्युत बस सेवा को लेकर छात्रों ने अपनी चिंताएं और सुझाव विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष रखे हैं। छात्र नेता आशुतोष सिंह "यीशु" के नेतृत्व में छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कुलसचिव राजन श्रीवास्तव को ज्ञापन सौंपकर बस सेवा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार करने की मांग की।

ज्ञापन में छात्रों ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक परिवहन व्यवस्था के उद्देश्य से शुरू की गई विद्युत बस सेवा एक सकारात्मक पहल है, लेकिन इसके साथ सुरक्षा, पारदर्शिता और छात्र-हितों को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। छात्रों का कहना है कि किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले उसके संचालन और सुरक्षा मानकों की स्पष्ट जानकारी विश्वविद्यालय समुदाय के सामने रखी जानी चाहिए।

प्रतिनिधिमंडल ने वर्ष 2013 में विश्वविद्यालय परिसर में हुई बस दुर्घटना का उल्लेख करते हुए नई बस सेवा के लिए निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल को सार्वजनिक करने की मांग की। छात्रों का कहना है कि सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं पर स्पष्टता होना आवश्यक है, ताकि विद्यार्थियों और कर्मचारियों में विश्वास बना रहे।

ज्ञापन के माध्यम से छात्रों ने विश्वविद्यालय पहचान पत्र धारक विद्यार्थियों और कर्मचारियों के लिए बस सेवा को निःशुल्क किए जाने की मांग भी उठाई। उनका तर्क है कि परिसर के भीतर परिवहन सुविधा विश्वविद्यालय परिवार की सुविधा के लिए है, इसलिए इसके लिए अतिरिक्त किराया लिया जाना उचित नहीं माना जा सकता।

इस अवसर पर छात्र नेता आशुतोष सिंह "यीशु" ने कहा कि छात्र आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल सुविधाओं के विरोधी नहीं हैं, लेकिन हर योजना छात्र-हित, सुरक्षा और जवाबदेही के मानकों पर खरी उतरनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि विश्वविद्यालय पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना चाहता है, तो प्रशासन को अपनी आधिकारिक गाड़ियों को भी चरणबद्ध तरीके से विद्युत वाहनों में परिवर्तित करने की दिशा में पहल करनी चाहिए।