बीएचयू के पेड़ों से रूबरू हुए विद्यार्थी, जानी हरित विरासत की अनकही कहानियां, ‘वॉक एंड टॉक विद ट्रीज़’ के तहत दो घंटे प्रकृति संवाद
वाराणसी। बीएचयू के हरे-भरे परिसर में रविवार को विद्यार्थियों और प्रकृति प्रेमियों ने पेड़ों के बीच समय बिताकर उनकी खूबियों और महत्व को करीब से जाना। पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित ‘वॉक एंड टॉक विद ट्रीज़’ कार्यक्रम में प्रतिभागियों को परिसर में मौजूद विभिन्न वृक्ष प्रजातियों की पहचान कराने के साथ उनकी ऐतिहासिक, पारिस्थितिक और पर्यावरणीय भूमिका से परिचित कराया गया।
सुबह सात से नौ बजे तक चले इस कार्यक्रम की शुरुआत विश्वनाथ मंदिर के प्रवेश द्वार से हुई। यहां से प्रतिभागियों ने बॉटनिकल गार्डन, आईईएसडी और स्वतंत्रता भवन होते हुए सेंट्रल नर्सरी तक भ्रमण किया। इस दौरान विशेषज्ञों ने अलग-अलग वृक्ष प्रजातियों की विशेषताओं, उनके उपयोग और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में उनकी भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को बताया गया कि पेड़ केवल छाया और ऑक्सीजन देने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे जैव विविधता को बनाए रखने, मिट्टी के संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन में भी अहम भूमिका निभाते हैं। बीएचयू परिसर में मौजूद समृद्ध हरित विरासत को समझने का यह विद्यार्थियों के लिए अनूठा अवसर रहा। आयोजकों ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य केवल वृक्षों की पहचान कराना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को प्रकृति से जोड़ना और उनके संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करना है। हर पेड़ का अपना पर्यावरणीय और ऐतिहासिक महत्व है, जिसे समझना जरूरी है।
कार्यक्रम का आयोजन बीएचयू की हॉर्टिकल्चरिस्ट यूनिट की ओर से किया गया। इसमें सृजन संस्था एवं धारिणी संस्था के अध्यक्ष प्रोफेसर सरफराज आलम, इंचार्ज अश्विनी, प्रकाशानंद, मनोज कुमार, मदन चौरसिया और धर्मेंद्र पटेल सहित अन्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों को संदेश दिया गया कि प्राकृतिक विरासत को बचाने के लिए पेड़ों को जानना, उनसे जुड़ना और उनका संरक्षण करना आवश्यक है।