सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में धूमधाम से मनाया गया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, भक्ति, संगीत और मनमोहक झांकी ने मोहा मन

सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ धूमधाम से मनाया गया। वाग्देवी मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों ने भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना कर विश्वकल्याण, संस्कृत के विकास, विश्वविद्यालय के अभ्युदय और स्वस्थ समाज के सृजन की कामना की। कार्यक्रम के दौरान भजन, कथा, आरती और आकर्षक झांकी ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
 

विश्वकल्याण व विश्वविद्यालय के अभ्युदय की कामना से हुआ पूजन, वेदांती प्रो. सुधाकर मिश्र ने सुनाई भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा

संगीत विभाग की टीम ने भजन प्रस्तुत कर माहौल बनाया भक्तिमय, मंदिर मंडप में सजाई गई आकर्षक श्रीकृष्ण बाल लीला की झांकी

नवीन पीढ़ी को भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और आदर्शों से परिचित कराने पर जोर

वाराणसी। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ धूमधाम से मनाया गया। वाग्देवी मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों ने भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना कर विश्वकल्याण, संस्कृत के विकास, विश्वविद्यालय के अभ्युदय और स्वस्थ समाज के सृजन की कामना की। कार्यक्रम के दौरान भजन, कथा, आरती और आकर्षक झांकी ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।


वरिष्ठ आचार्य एवं दर्शन संकाय प्रमुख प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन के विभिन्न पक्षों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीकृष्ण देवकी और वसुदेव के आठवें पुत्र थे। उन्होंने अत्याचारी कंस का वध कर असत्य और अन्याय का शमन किया। उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी केवल उत्सव नहीं, बल्कि अन्याय, अहंकार और अत्याचार के शमन का संदेश देने वाला पर्व है।

आदर्श व्यक्तित्व और धर्म के मार्ग की प्रेरणा
प्रो. शुक्ल ने कहा कि भगवान कृष्ण आदर्श व्यक्तित्व के प्रतीक हैं। उनका जीवन भक्ति, प्रेम, धर्म और सच्चे जीवन-मूल्यों की प्रेरणा देता है। वहीं प्रो. महेंद्र पांडेय ने जन्माष्टमी को भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और आराधना का महान अवसर बताते हुए कहा कि इस दिन भक्त पूजा, जप और कीर्तन के माध्यम से भगवान का स्मरण करते हैं।

वेदांती ने सुनाई श्रीकृष्ण जन्म की कथा
वेदांती प्रो. सुधाकर मिश्र ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और कंस के अत्याचार से जुड़ी कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि आकाशवाणी के बाद कंस ने देवकी और वसुदेव को कारागार में डाल दिया और उनकी संतानों की हत्या करने लगा। अंततः श्रीकृष्ण ने कंस का वध कर अत्याचार और अन्याय का अंत किया।


वैदिक विधि से हुआ पूजन
कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल और प्रो. शैलेश कुमार मिश्र ने वैदिक विधि से भगवान श्रीकृष्ण एवं मां वाग्देवी की पूजा-अर्चना और आरती की। संगीत विभाग की डॉ. श्रुति उपाध्याय एवं उनकी टीम ने मधुर भजन और गीत प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल, प्रो. शैलेश कुमार मिश्र, प्रो. विजय कुमार पाण्डेय, डॉ. रविशंकर पांडेय, डॉ. श्रुति उपाध्याय, अजितेश द्विवेदी, डॉ. सच्चिदानंद सहित विश्वविद्यालय परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।