सहस्र चंडी महायज्ञ में छिन्नमस्तिका माता की विशेष आराधना, आठवें दिन वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ पूजन-अनुष्ठान
वाराणसी। पंचकोशी मार्ग स्थित आदि शंकराचार्य महासंस्थानम में जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज के मार्गदर्शन और सानिध्य में चल रहे सहस्र चंडी महायज्ञ में सोमवार को आठवें दिन छिन्नमस्तिका माता का विशेष पूजन-अनुष्ठान श्रद्धा और वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। सुबह से ही महायज्ञ परिसर वैदिक मंत्रोच्चार, हवन और धार्मिक अनुष्ठानों से आध्यात्मिक वातावरण में सराबोर रहा। बड़ी संख्या में संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं ने अनुष्ठान में सहभागिता कर मां भगवती की आराधना की।
सुप्रभात बेला में यज्ञाचार्यों ने सर्वप्रथम वेदी पूजन किया। इसके बाद यज्ञ के सभी स्तंभों का विधिवत पूजन संपन्न कराया गया। जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज के मार्गदर्शन में छिन्नमस्तिका माता का विशेष पूजन-अनुष्ठान कराया गया। वैदिक मंत्रों के उच्चारण से पूरा यज्ञ परिसर गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं ने मां भगवती से लोककल्याण, सुख-शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की कामना की।
साधना और यज्ञ में निहित है सनातन धर्म की शक्ति
जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि सनातन धर्म की शक्ति उसकी साधना, यज्ञ, तप और आध्यात्मिक परंपराओं में निहित है। मां भगवती के विभिन्न स्वरूपों की आराधना भारतीय संस्कृति में शक्ति उपासना की समृद्ध परंपरा का प्रतीक है। धार्मिक अनुष्ठानों का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत कल्याण तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज और संपूर्ण विश्व के कल्याण की भावना को मजबूत करना भी है। सहस्र चंडी महायज्ञ जैसे आयोजन सनातन संस्कृति की आध्यात्मिक चेतना को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करते हैं।
वैदिक परंपरा के अनुरूप हो रहा महायज्ञ
महायज्ञ का संपूर्ण अनुष्ठान यज्ञाचार्य तेजमणि तिवारी की देखरेख में वैदिक परंपराओं के अनुसार कराया जा रहा है। आचार्यों द्वारा निर्धारित विधि-विधान के तहत पूजन, हवन और अन्य धार्मिक क्रियाएं संपन्न कराई जा रही हैं। आठवें दिन के विशेष अनुष्ठान में लखनऊ से मिथिलेश दीक्षित, डॉ. विनय मिश्रा सपत्नीक, जयगांव भूटान से बाबूलाल मुवडा, सच्चिदानंद तिवारी, बृजभूषानंद सरस्वती, रामलखन दास नागा सहित बड़ी संख्या में संत-महात्मा और श्रद्धालु मौजूद रहे। महायज्ञ स्थल पर दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही और लोगों ने जगद्गुरु शंकराचार्य के सानिध्य में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान में सहभागिता की।