सहस्त्र चंडी महायज्ञ में दस महाविद्याओं का विशेष जप, वैदिक मंत्रोच्चार से गूंजा महासंस्थानम
वाराणसी। पंचकोशी मार्ग स्थित आदि शंकराचार्य महासंस्थानम में जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज के मार्गदर्शन में चल रहे सहस्त्र चंडी महायज्ञ के तीसरे दिन बुधवार को विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान विधि-विधान के साथ संपन्न हुए। प्रातःकाल चतुर्थ विश्वेश उद्घोष के साथ महायज्ञ के अनुष्ठानों का शुभारंभ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां भगवती की आराधना, दुर्गा सप्तशती पाठ और यज्ञीय कर्मकांड संपन्न कराए गए।
महायज्ञ के तीसरे दिन आचार्यों और विद्वान ब्राह्मणों ने विधिपूर्वक पूजन कर दुर्गा सप्तशती का पाठ किया। पाठ के दौरान मां भगवती के विभिन्न स्वरूपों का स्मरण करते हुए विश्व शांति, राष्ट्र की उन्नति और जनकल्याण की कामना की गई। इसके बाद यज्ञ मंडप में स्थापित विभिन्न वेदियों का विधिवत पूजन कराया गया।
जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि शक्ति की आराधना सनातन संस्कृति की महत्वपूर्ण परंपरा है। सहस्त्र चंडी महायज्ञ के माध्यम से मां भगवती की उपासना के साथ समाज और राष्ट्र के कल्याण का संकल्प लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यज्ञ धार्मिक आस्था का अनुष्ठान होने के साथ सकारात्मक ऊर्जा और सद्भाव के संचार का माध्यम भी है।
वेदी पूजन के बाद यज्ञाग्नि में वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ आहुतियां अर्पित की गईं। हवन के दौरान स्वाहा के उद्घोष से पूरा यज्ञ परिसर गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भी धार्मिक अनुष्ठान में सहभागिता की। हवन के उपरांत मां भगवती की आरती की गई। आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर देवी का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद दिन के धार्मिक कार्यक्रमों को विश्राम दिया गया।
रात्रिकालीन बेला में सहस्त्र चंडी महायज्ञ के अंतर्गत दस महाविद्याओं के जप का विशेष अनुष्ठान आयोजित किया गया। साधकों और आचार्यों ने विधि-विधानपूर्वक दस महाविद्याओं का जप करते हुए देवी शक्ति का आह्वान किया। रात्रि अनुष्ठान के दौरान मंत्रोच्चार से महासंस्थानम परिसर का वातावरण आध्यात्मिक एवं भक्तिमय बना रहा।
महायज्ञ में प्रतिदिन निर्धारित क्रम के अनुसार पूजन, पाठ, हवन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान कराए जा रहे हैं। जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज के मार्गदर्शन में चल रहे इस आयोजन में श्रद्धालुओं की सहभागिता निरंतर बनी हुई है। आयोजकों के अनुसार महायज्ञ के माध्यम से धार्मिक चेतना के साथ विश्व शांति, राष्ट्रहित और जनकल्याण की भावना को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।