काशी से ज्योर्तिमठ तक मना शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद का 102वां प्राकट्योत्सव, श्रीविद्यामठ में चरण पादुका पूजन और रुद्राभिषेक, 108 वैदिक विद्यार्थियों ने किया चतुर्वेद परायण

ब्रह्मलीन द्वयपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज का 102वां प्राकट्योत्सव सोमवार को काशी समेत देश-विदेश के विभिन्न स्थानों पर श्रद्धा और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। काशी के श्रीविद्यामठ में दिनभर धार्मिक अनुष्ठान, वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और भंडारे का आयोजन हुआ। वहीं छत्तीसगढ़ के बेमेतरा स्थित सपाद लक्षेश्वर धाम सलधा और ज्योर्तिमठ सहित अन्य स्थानों पर भी भक्तों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।
 

वाराणसी। ब्रह्मलीन द्वयपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज का 102वां प्राकट्योत्सव सोमवार को काशी समेत देश-विदेश के विभिन्न स्थानों पर श्रद्धा और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। काशी के श्रीविद्यामठ में दिनभर धार्मिक अनुष्ठान, वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और भंडारे का आयोजन हुआ। वहीं छत्तीसगढ़ के बेमेतरा स्थित सपाद लक्षेश्वर धाम सलधा और ज्योर्तिमठ सहित अन्य स्थानों पर भी भक्तों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।

श्रीविद्यामठ में कार्यक्रम का शुभारंभ ब्रह्मलीन शंकराचार्य की चरण पादुकाओं के विधिवत पूजन से हुआ। श्रीविद्यामठ प्रभारी ब्रह्मचारी परमात्मानंद के नेतृत्व में वैदिक आचार्यों ने मंत्रोच्चार के बीच पूजन संपन्न कराया। इसके बाद आचार्य मणि झा, ओमप्रकाश पाण्डेय, विनय भूषण तिवारी, शिवाकांत मिश्रा और अनिरुद्ध मिश्रा ने रुद्राभिषेक कराया। रुद्राभिषेक के बाद मोदक से अर्चन किया गया।

धार्मिक अनुष्ठानों के क्रम में 108 वैदिक विद्यार्थियों ने चतुर्वेद का परायण किया। वेद मंत्रों और स्तोत्रों के उच्चारण से श्रीविद्यामठ का वातावरण भक्तिमय हो उठा। दिनभर भजन-कीर्तन चलता रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया।

स्वतंत्रता आंदोलन से राम मंदिर आंदोलन तक सक्रिय भूमिका
शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का जीवन सनातन धर्म, राष्ट्र और समाज के लिए समर्पित रहा। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की और इस दौरान दो बार जेल गए। मध्य प्रदेश में अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

उन्होंने बताया कि शंकराचार्य ने जीवन में 72 चातुर्मास्य व्रत-अनुष्ठान किए। राम मंदिर आंदोलन के दौरान भी उन्होंने संघर्ष किया और जेल गए। उनके निर्देश पर वर्तमान ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने रामालय न्यास के माध्यम से रामजन्मभूमि से जुड़े मामलों में न्यायालय और अन्य मंचों पर पक्ष रखा।

गंगा संरक्षण और सामाजिक सेवा पर भी जोर
मीडिया प्रभारी के अनुसार गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित कराने के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाया गया। रामसेतु संरक्षण के लिए भी धार्मिक और सामाजिक स्तर पर प्रयास किए गए। वनवासी, आदिवासी, दलित और महादलित समाज के धर्मांतरित लोगों को पुनः सनातन धर्म से जोड़ने के लिए अभियान चलाया गया। वर्तमान में भी उनके मार्गदर्शन से निःशुल्क चिकित्सालय, वेद विद्यालय, वृद्धाश्रम और गौशालाओं समेत विभिन्न सेवा कार्य संचालित किए जा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में भी हुआ आयोजन
बेमेतरा के सपाद लक्षेश्वर धाम सलधा में भी प्राकट्योत्सव मनाया गया। यहां वर्तमान ज्योतिष्पीठाधीश्वर स्वामिश्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का चातुर्मास्य व्रत-अनुष्ठान चल रहा है। ज्योर्तिमठ समेत देश के विभिन्न हिस्सों और विदेशों में भी भक्तों ने धार्मिक आयोजन कर ब्रह्मलीन शंकराचार्य को स्मरण किया।