चातुर्मास्य व्रत पूर्ण कर 29 सितंबर को काशी पहुंचेंगे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद
वाराणसी। ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के सलधा ग्राम स्थित सपाद लक्षेश्वर धाम में चातुर्मास्य व्रत अनुष्ठान का संकल्प पूर्ण करने के बाद मंगलवार, 29 सितंबर को काशी पहुंचेंगे। उनके आगमन को लेकर संतों और भक्तों में उत्साह है। काशी पहुंचने पर श्रीविद्यामठ के प्रभारी ब्रह्मचारी परमात्मानंद के नेतृत्व में संतों व भक्तों द्वारा पुष्पवर्षा और जयकारों के बीच उनका स्वागत किया जाएगा। इसके बाद श्रीविद्यामठ में शंकराचार्य की चरण पादुका का पूजन और आरती होगी।
नवरात्र तक काशी में रहेगा प्रवास
मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि शंकराचार्य महाराज नवरात्र पर्यंत काशी में विराजमान रहेंगे। इस दौरान विभिन्न आध्यात्मिक अनुष्ठान और मांगलिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
नियमित साधना और धार्मिक आयोजन
उन्होंने बताया कि चातुर्मास्य व्रत के दौरान शंकराचार्य की दिनचर्या धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़ी रही। प्रतिदिन सुबह 4:30 बजे गणेश पूजन और 6:45 बजे सूर्य पूजन किया जाता था। इसके बाद सुबह 8:30 से 9:30 बजे तक दंडी संन्यासियों, ब्रह्मचारियों और भक्तों को प्रस्थानत्रयी वेदांत का पाठ कराया जाता था। 9:45 बजे श्रीविष्णु पूजन तथा दोपहर तीन से शाम पांच बजे तक शिव महापुराण कथा होती थी। शाम 6:45 बजे शक्ति पूजन के साथ दैनिक अनुष्ठान पूर्ण होता था।
अनंत चतुर्दशी पर पूर्ण हुआ व्रत
26 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन चातुर्मास्य व्रत पूर्ण होने के बाद शंकराचार्य ने सलधा ग्राम में घर-घर जाकर भक्तों को दर्शन और प्रसाद प्रदान किया। इसके बाद उन्होंने नदी का सीमोल्लंघन कर मध्य प्रदेश के बरहटा क्षेत्र में प्रवेश किया, जहां भक्तों ने ढोल-नगाड़ों और पुष्पवर्षा के साथ स्वागत किया। इसके बाद वे नरसिंहपुर स्थित परमहंसी गंगा आश्रम पहुंचे और ब्रह्मलीन द्विपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की पुण्यतिथि समाराधना में शामिल हुए। वहां से शंकराचार्य सड़क मार्ग से काशी के लिए प्रस्थान करेंगे। उनके आगमन की सूचना से संतों और भक्तों में उत्साह का माहौल है।