अल्जाइमर मरीजों के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान जरूरी, बीएचयू में जागरुकता गोष्ठी, मरीजों की देखभाल में परिवार की भूमिका पर दिया जोर
वाराणसी। विश्व अल्जाइमर दिवस पर सोमवार को इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आईएमएस), बीएचयू के मनोचिकित्सा विभाग में एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें अल्जाइमर रोग के लक्षणों, मरीजों की देखभाल और उनके प्रति सामाजिक संवेदनशीलता की आवश्यकता पर चर्चा की गई। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रीति सिंह ने किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आईएमएस, बीएचयू के निदेशक प्रोफेसर एसएन संखवार रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री, रांची के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं साइकियाट्रिक सोशल वर्क के प्रभारी डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव उपस्थित रहे। आयोजन की अध्यक्षता चिकित्सा संकाय के डीन प्रोफेसर संजय गुप्ता ने की, जबकि आयोजन सचिव मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष प्रोफेसर एके पांडेय रहे।
डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव ने कहा कि अल्जाइमर से प्रभावित मरीजों के साथ धैर्य, संवेदनशीलता और सम्मान के साथ व्यवहार करना चाहिए। परिवार के सदस्यों की जिम्मेदारी है कि वे मरीज को समय पर दवा और भोजन उपलब्ध कराने के साथ दैनिक गतिविधियों में भी सहयोग करें। भूलने की समस्या को लेकर मरीज को बार-बार टोकने या उसका एहसास कराने के बजाय समझदारी से मदद करनी चाहिए। मरीज को परिवार और समाज से अलग-थलग महसूस नहीं होने देना चाहिए।
प्रोफेसर संजय गुप्ता ने कहा कि विश्व अल्जाइमर दिवस पर सभी को संकल्प लेना चाहिए कि इस बीमारी से प्रभावित व्यक्तियों को अपने से अलग नहीं मानेंगे और उनकी उचित देखभाल एवं सम्मान सुनिश्चित करेंगे। प्रोफेसर एके पांडेय ने कहा कि अल्जाइमर रोग के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है। यह छुआछूत की बीमारी नहीं है। ऐसे में मरीजों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव या उपेक्षा नहीं होनी चाहिए। परिवार और समाज को मिलकर उनकी देखभाल करनी चाहिए।
कार्यक्रम में सैकड़ों छात्र-छात्राओं, स्वास्थ्यकर्मियों, मरीजों के परिजनों और अन्य लोगों ने सहभागिता की। उपस्थित लोगों ने अल्जाइमर से प्रभावित व्यक्तियों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार करने और उनकी देखभाल में सहयोग देने की प्रतिज्ञा ली। समापन पर क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. सोनाली दीक्षित ने धन्यवाद ज्ञापन किया।