RSS के पूर्व सह प्रान्त व्यवस्था प्रमुख बैकुंठ नाथ मिश्र का निधन, 8 साल की उम्र में संघ से जुड़े, मणिकर्णिका घाट पर हुआ अंतिम संस्कार
- पूर्व सह प्रांत व्यवस्था प्रमुख ने जीवनभर संगठन विस्तार और कार्यकर्ता निर्माण में निभाई अहम भूमिका
- बड़े पुत्र तिलक राज मिश्र ने दी मुखाग्नि, संघ के वरिष्ठ स्वयंसेवकों ने जताया शोक
वाराणसी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ कार्यकर्ता एवं पूर्व सह प्रांत व्यवस्था प्रमुख बैकुंठ नाथ मिश्र का निधन हो गया। उनके निधन से संघ परिवार और उनसे जुड़े सामाजिक संगठनों में शोक की लहर है। महज आठ वर्ष की उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ने वाले बैकुंठ नाथ मिश्र ने अपना अधिकांश जीवन संगठन के विस्तार, कार्यकर्ता निर्माण और सामाजिक गतिविधियों में लगाया। उनकी अंतिम यात्रा दारानगर स्थित आवास से निकाली गई और मणिकर्णिका घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके बड़े पुत्र तिलक राज मिश्र ने मुखाग्नि दी।
आठ साल की उम्र में संघ से जुड़े, कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं
बैकुंठ नाथ मिश्र का जन्म 8 सितंबर 1948 को हुआ था। बचपन से ही उनका जुड़ाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से हो गया था। आठ वर्ष की उम्र में संघ की शाखा से शुरू हुआ उनका सफर विभिन्न संगठनात्मक जिम्मेदारियों तक पहुंचा। उन्होंने शाखा स्तर पर कार्य करने के साथ महानगर और प्रांत स्तर पर सह व्यवस्था प्रमुख जैसे महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया। संघ की गतिविधियों को आगे बढ़ाने और नए कार्यकर्ताओं को संगठन से जोड़ने में उनकी सक्रिय भूमिका रही।
बैंक की नौकरी के साथ संघ की शाखाओं में रहे सक्रिय
बैकुंठ नाथ मिश्र ने अपने पेशेवर जीवन और संगठनात्मक जिम्मेदारियों के बीच तालमेल बनाए रखा। बैंक में नौकरी करने के दौरान भी वह नियमित रूप से संघ की गतिविधियों में हिस्सा लेते रहे। वह सुबह और शाम की शाखाओं में प्रवास करते थे और स्वयंसेवकों से संपर्क कर उन्हें संगठनात्मक कार्यों के लिए प्रेरित करते थे। उन्होंने शाखाओं के माध्यम से अनेक कार्यकर्ताओं को तैयार करने में योगदान दिया। बैकुंठ नाथ मिश्र यूको बैंक में वरिष्ठ शाखा प्रबंधक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद भी सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों से उनका जुड़ाव बना रहा।
भारतीय मजदूर संघ और विद्यार्थी परिषद से भी रहा जुड़ाव
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अलावा बैकुंठ नाथ मिश्र कई अन्य सामाजिक और अनुषांगिक संगठनों से भी जुड़े रहे। उन्होंने भारतीय मजदूर संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और जनसेवा न्यास ट्रस्ट में विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। जनसेवा न्यास ट्रस्ट में उन्होंने उपाध्यक्ष के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। इसके अलावा वह टाउन हॉल की सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे। संगठन से जुड़े लोगों के अनुसार, उन्होंने सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से भी लोगों को जोड़ने का काम किया।
दारानगर से निकली अंतिम यात्रा, मणिकर्णिका घाट पर दी गई मुखाग्नि
बैकुंठ नाथ मिश्र की अंतिम यात्रा दारानगर स्थित उनके निवास स्थान से रात करीब 10:30 बजे निकाली गई। इसके बाद पार्थिव शरीर को मणिकर्णिका घाट ले जाया गया, जहां उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। उनके बड़े पुत्र तिलक राज मिश्र ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की परंपरा पूरी की। बैकुंठ नाथ मिश्र अपने पीछे पत्नी, तीन पुत्र, तीन पुत्रवधू, तीन पोते और तीन पोतियों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।
संघ के वरिष्ठ स्वयंसेवकों ने जताया शोक
बैकुंठ नाथ मिश्र के निधन पर जनसेवा न्यास वाराणसी के मंत्री प्रदीप कुमार सहित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनेक वरिष्ठ स्वयंसेवकों और उनसे जुड़े लोगों ने शोक व्यक्त किया। संगठन से जुड़े लोगों ने उनके लंबे संगठनात्मक जीवन और सामाजिक योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि बैकुंठ नाथ मिश्र ने बैंक की नौकरी के साथ संघ की जिम्मेदारियों को भी पूरी निष्ठा से निभाया और कार्यकर्ता निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके निधन को संघ और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने अपूरणीय क्षति बताया है।