काशी में संकष्टी गणेश चतुर्थी आज, बड़ा गणेश मंदिर में भक्तों की उमड़ी भीड़, पारण रात चंद्रोदय के बाद

 

वाराणसी। शिव की नगरी काशी में सोमवार को भगवान गणेश की हेरंब संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जा रहा है। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि आज सुबह करीब 8:50 बजे लग गई है। लोहटिया स्थित बड़ा गणेश मंदिर, ढूंढिराज गणेश, चिंतामणि गणेश और विश्वनाथ धाम परिसर के गणेश विग्रहों पर सुबह से ही दर्शन-पूजन का क्रम चल रहा है।

पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि 31 अगस्त सुबह लगभग 8:50–8:52 बजे प्रारंभ होकर 1 सितंबर सुबह करीब 7:41–7:43 बजे तक रहेगी। संकष्टी व्रत में चंद्रोदय व्यापिनी तिथि प्रधान मानी जाती है, इसलिए व्रत आज सोमवार को ही रखा गया है। वाराणसी में सूर्योदय करीब 5:38 बजे और सूर्यास्त करीब 6:18 बजे है। काशी में चंद्रोदय लगभग रात 8:09 से 8:19 बजे के बीच होगा। व्रती इसी समय चंद्र दर्शन कर अर्घ्य देने के बाद पारण करेंगे।

आज का योग भी विशेष है। रेवती नक्षत्र और गंड योग के साथ कजरी तीज तथा बहुला चतुर्थी का संयोग है। काशी की कई महिलाओं ने पुत्र की दीर्घायु और संकट निवारण के लिए व्रत रखा है। बहुला चतुर्थी की परंपरा में गणेश पूजा के साथ गाय-बछड़े के पूजन की भी मान्यता है।

काशी के प्रमुख गणेश मंदिर
लोहटिया का बड़ा गणेश मंदिर (वक्रतुंड विनायक) संकष्टी पर सबसे अधिक भीड़ वाला केंद्र रहता है। माघ की संकष्टी पर यहां किलोमीटर लंबी कतारें लग चुकी हैं। पुजारी परंपरा के अनुसार मूर्ति पर सिंदूर लेपन, दूर्वा-पुष्प शृंगार और आरती के बाद कपाट भक्तों के लिए खोल दिए जाते हैं। ढूंढिराज गणेश, चिंतामणि गणेश और काशी विश्वनाथ परिसर स्थित गणेश विग्रह पर भी विशेष पूजा हो रही है।

व्रत और पूजा विधि
व्रती ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर संकल्प लें। दिनभर फलाहार या निर्जला व्रत रखें। शाम को गणेश जी की षोडशोपचार पूजा करें। 21 दूर्वा, मोदक या लड्डू, लाल फूल, रोली-अक्षत और सिंदूर अवश्य चढ़ाएं। तुलसी न चढ़ाएं।
चंद्रोदय होते ही तांबे या चांदी के लोटे में शुद्ध जल, कच्चा दूध, रोली, अक्षत और पुष्प मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। अर्घ्य के बाद ही प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोलें। बिना चंद्र अर्घ्य के संकष्टी व्रत अधूरा माना जाता है।

मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः

आने वाला बड़ा पर्व
मासिक संकष्टी के बाद काशीवासी अब भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। मुख्य गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026, सोमवार को है। वाराणसी पंचांग के अनुसार उस दिन मध्याह्न स्थापना-पूजा का मुहूर्त सुबह 10:39 बजे से दोपहर 1:07 बजे तक रहेगा। दस दिवसीय उत्सव अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर, शुक्रवार को विसर्जन के साथ पूरा होगा। इस बार कई पंचांगों में 14 सितंबर को हरतालिका तीज का भी योग बन रहा है। ऐसे में सुबह हरतालिका पूजा और मध्याह्न में गणपति स्थापना का क्रम रखा जा सकता है।
अगली संकष्टी 29 सितंबर 2026 को विघ्नराज संकष्टी के रूप में आएगी।

काशी में मान्यता है कि विघ्नहर्ता गणेश की आराधना से घर के संकट कटते हैं और नए काम निर्विघ्न पूरे होते हैं। श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि मंदिर परिसर में व्यवस्था का पालन करें और पारण के लिए स्थानीय चंद्रोदय समय का ध्यान रखें।