काशी में सहस्त्र चंडी महायज्ञ: गणेश चतुर्थी पर सप्त ऋषियों का पूजन और विशेष हवन
वाराणसी। पंचकोशी मार्ग स्थित आदि शंकराचार्य महासंस्थानम पंचकोश आश्रम में चल रहे सहस्त्र चंडी महायज्ञ के दौरान मंगलवार को गणेश चतुर्थी पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान हुए। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती के सानिध्य में भगवान गणेश का विशेष पूजन किया गया। इसके साथ ही सप्त ऋषियों का आवाहन, पूजन और हवन वैदिक विधि-विधान से संपन्न हुआ।
गणेश चतुर्थी पर सबसे पहले भगवान गणेश का पूजन-अर्चन किया गया। गणपति का आवाहन कर पुष्प, अक्षत, दूर्वा और मोदक सहित अन्य पूजन सामग्री अर्पित की गई। वैदिक मंत्रोच्चार और गणेश वंदना के बीच हवन हुआ। श्रद्धालुओं ने यज्ञाग्नि में आहुतियां देकर सुख-समृद्धि, विघ्नों के निवारण और लोककल्याण की कामना की।
सप्त ऋषियों का किया आवाहन, यज्ञाग्नि में दी आहुतियां
इसके बाद सप्त ऋषियों के विशेष पूजन और हवन का आयोजन किया गया। वैदिक परंपरा के अनुसार सप्त ऋषियों का आवाहन कर पूजन-अर्चन किया गया। यज्ञाग्नि में विशेष आहुतियां समर्पित कर ऋषि परंपरा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई।
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि भगवान गणेश विघ्नहर्ता और मंगल के अधिष्ठाता हैं, जबकि सप्त ऋषि भारतीय वैदिक ज्ञान और तपस्या की महान परंपरा के प्रतीक हैं। गणेश पूजन और सप्त ऋषि पूजन मानव जीवन में धर्म, ज्ञान, विवेक और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देते हैं।
उन्होंने कहा कि यज्ञ का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत कल्याण नहीं, बल्कि समाज, राष्ट्र और संपूर्ण विश्व के मंगल की भावना को मजबूत करना भी है।
वैदिक मंत्रों से गूंजा आश्रम परिसर
महायज्ञ के यज्ञाचार्य आचार्य तेजमणि त्रिपाठी के निर्देशन में विद्वान आचार्यों और ब्राह्मणों ने अनुष्ठान संपन्न कराए। देव आवाहन से लेकर पूजन, हवन और आहुतियों की पूरी प्रक्रिया वैदिक एवं शास्त्रोक्त विधि से हुई। मंत्रोच्चार और गणपति वंदना से आश्रम परिसर भक्तिमय रहा।
इस अवसर पर डॉ. विनय मिश्रा, सच्चिदानंद तिवारी, देव नारायण शुक्ल और यतींद्र उपाध्याय सहित श्रद्धालु उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने पूजन और हवन में हिस्सा लेकर स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती का आशीर्वाद लिया। अनुष्ठान के दौरान लोककल्याण, धर्मरक्षा, राष्ट्र की उन्नति और सर्वजन के सुख-शांति की कामना की गई।