निर्जला एकादशी पर गंगा संरक्षण का संकल्प, दशाश्वमेध घाट पर चला विशेष स्वच्छता अभियान
वाराणसी। निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर नमामि गंगे के स्वयंसेवी कार्यकर्ताओं ने दशाश्वमेध घाट पर विशेष स्वच्छता एवं श्रमदान अभियान चलाकर गंगा संरक्षण और जल बचाओ का संदेश दिया। अभियान के दौरान स्वयंसेवकों ने गंगाजल में मौजूद अपशिष्ट पदार्थों को हटाकर घाट क्षेत्र की सफाई की और लोगों को स्वच्छता तथा जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया।
सुबह से ही नमामि गंगे के कार्यकर्ता दशाश्वमेध घाट पर एकत्र हुए और गंगा में प्रवाहित हो रही फूल-मालाएं, प्लास्टिक, पॉलीथिन तथा अन्य कचरे को निकालने का कार्य शुरू किया। अभियान का उद्देश्य गंगा की स्वच्छता बनाए रखने के साथ-साथ लोगों को यह संदेश देना था कि धार्मिक आस्था के नाम पर जल स्रोतों को प्रदूषित करना उचित नहीं है। स्वयंसेवकों ने घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों से अपील की कि पूजा-अर्चना के बाद बची सामग्री को सीधे गंगा में प्रवाहित करने के बजाय निर्धारित स्थानों पर ही डालें।
अभियान के दौरान "स्वच्छ जल–स्वस्थ समाज" का संदेश प्रमुखता से दिया गया। कार्यकर्ताओं ने कहा कि स्वच्छ जल मानव जीवन की मूल आवश्यकता है और जल स्रोतों को प्रदूषण मुक्त रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सभ्यता और करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में इसकी स्वच्छता और अविरलता को बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है।
नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक एवं नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला ने कहा कि निर्जला एकादशी का पर्व जल के महत्व को समझने और उसके संरक्षण का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जल संसाधनों पर बढ़ता दबाव चिंता का विषय है। यदि समय रहते जल संरक्षण के प्रति गंभीर प्रयास नहीं किए गए तो भविष्य में जल संकट और गहरा सकता है।
उन्होंने कहा कि गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाने में केवल सरकारी योजनाएं ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि जनभागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है। जब तक समाज का प्रत्येक व्यक्ति स्वच्छता और जल संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेगा, तब तक स्थायी परिवर्तन संभव नहीं होगा। अभियान में राजेश शुक्ला, महानगर सहसंयोजक सारिका गुप्ता, राजीव चौबे, रंजन सिंह सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवी सदस्य शामिल रहे।