बीएचयू के खेल मैदानों की ₹8.61 लाख बुकिंग राशि पर उठे सवाल, RTI में मैदानवार और बुकिंगवार विवरण न मिलने पर अधिकारियों को विधिक नोटिस

बीएचयू के खेल मैदानों के इस्तेमाल और उनसे प्राप्त बुकिंग शुल्क को लेकर पारदर्शिता का मुद्दा सामने आया है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मिली जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद को दो वित्तीय वर्षों में खेल मैदानों की बुकिंग से कुल 8.61 लाख रुपये प्राप्त हुए। हालांकि, आरटीआई आवेदक का कहना है कि राशि का मैदानवार, बुकिंगवार और संस्था या एजेंसीवार पूरा विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया।
 

वाराणसी। बीएचयू के खेल मैदानों के इस्तेमाल और उनसे प्राप्त बुकिंग शुल्क को लेकर पारदर्शिता का मुद्दा सामने आया है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मिली जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद को दो वित्तीय वर्षों में खेल मैदानों की बुकिंग से कुल 8.61 लाख रुपये प्राप्त हुए। हालांकि, आरटीआई आवेदक का कहना है कि राशि का मैदानवार, बुकिंगवार और संस्था या एजेंसीवार पूरा विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया।

मामले को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अधिवक्ता संतोष कुमार त्रिपाठी ने संबंधित अधिकारियों को अलग-अलग विधिक नोटिस भेजे हैं। इनमें क्रीड़ा परिषद की केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी एवं महासचिव डॉ. कविता वर्मा, अपीलीय प्राधिकारी प्रो. अर्चना सिंह, ब्रोचा मैदान की केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी एवं मैदान प्रभारी निर्मला होरो और चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक शामिल हैं।

अधिवक्ता ने 16 जुलाई 2026 को आरटीआई आवेदन संख्या BANHU/R/E/26/00745 के माध्यम से बीएचयू के विभिन्न खेल मैदानों के इस्तेमाल, निजी प्रशिक्षकों और खेल अकादमियों को मैदान दिए जाने, अनुमति, शुल्क और बुकिंग से संबंधित दस्तावेज मांगे थे। अपेक्षित जानकारी पूरी नहीं मिलने पर 9 अगस्त को प्रथम अपील दाखिल की गई। क्रीड़ा परिषद के जवाब के अनुसार वर्ष 2024-25 में 5,19,500 रुपये और वर्ष 2025-26 में 3,41,500 रुपये बुकिंग शुल्क प्राप्त हुआ। अधिवक्ता ने इन आंकड़ों के साथ प्रत्येक मैदान, बुकिंग की तारीख, भुगतानकर्ता संस्था या व्यक्ति और मैदान के उपयोग का उद्देश्य स्पष्ट करने वाले रिकॉर्ड मांगे हैं।

मामले में एक अन्य बिंदु भी उठाया गया है। क्रीड़ा परिषद के जवाब में गैर-बीएचयू प्रतिभागियों को मैदानों में अनुमति नहीं होने की बात कही गई है, जबकि बाहरी एजेंसियों को मांग के आधार पर क्रीड़ा सुविधाएं किराये पर देने की व्यवस्था का भी उल्लेख है। नोटिस में इस व्यवस्था से संबंधित नियम, अनुमति और बुकिंग दस्तावेज मांगे गए हैं। ब्रोचा मैदान से जुड़े दस्तावेजों में खेल अकादमियों को मैदान देने की प्रक्रिया का उल्लेख है। वहीं, रुहिया ग्राउंड के संबंध में 25 अगस्त के जवाब में केवल इसे चिकित्सा विज्ञान संस्थान के अधीन बताया गया। इसके इस्तेमाल और शुल्क से जुड़ी मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।

नोटिस में संबंधित अधिकारियों से 15 दिनों के भीतर शेष सूचना और प्रमाणित दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा गया है। अधिवक्ता का कहना है कि सूचना नहीं मिलने पर केंद्रीय सूचना आयोग में द्वितीय अपील समेत उपलब्ध कानूनी उपाय अपनाए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उद्देश्य किसी व्यक्ति पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के सार्वजनिक संसाधनों के इस्तेमाल और उससे प्राप्त राशि में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।