IIT BHU के प्रो. ब्रह्मेश्वर मिश्रा को मिला ‘भैषजी शिक्षा रत्न’ सम्मान, फार्मेसी शिक्षा और शोध में उत्कृष्ट योगदान के लिए किया गया सम्मानित
वाराणसी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिंदू विश्वविद्यालय), आईआईटी (बीएचयू) के भैषजकीय अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. ब्रह्मेश्वर मिश्रा को फार्मेसी शिक्षा और शोध के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘भैषजी शिक्षा रत्न’ सम्मान से नवाजा गया है। फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) की ओर से 27 अक्टूबर को नई दिल्ली के द्वारका स्थित आईटीसी होटल में आयोजित समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया।
प्रो. मिश्रा ने आईआईटी (बीएचयू) में 42 वर्षों से अधिक समय तक शिक्षण, शोध और विद्यार्थियों के मार्गदर्शन में योगदान दिया है। उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों और शोध कार्यों ने फार्मेसी के क्षेत्र में उन्हें विशिष्ट पहचान दिलाई है।
लगातार छह वर्षों तक शीर्ष वैज्ञानिकों में रहे शामिल
प्रो. मिश्रा की अंतरराष्ट्रीय शोध प्रतिष्ठा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2020 से 2026 तक लगातार छह वर्षों के दौरान उन्हें फार्मेसी एवं फार्माकोलॉजी श्रेणी में विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में स्थान मिला। वहीं, वर्ष 2024 की ScholarGPS रैंकिंग के अनुसार, औषधि वितरण (ड्रग डिलीवरी) के क्षेत्र में वह विश्व के शीर्ष 0.1 प्रतिशत शोधकर्ताओं और फार्मेसी के व्यापक क्षेत्र में शीर्ष 0.34 प्रतिशत शोधकर्ताओं में शामिल रहे।
32 शोधार्थियों को कराया पीएचडी
शोध और शिक्षण के क्षेत्र में प्रो. मिश्रा का योगदान व्यापक रहा है। उन्होंने अब तक 32 शोधार्थियों को पीएचडी तथा 90 से अधिक विद्यार्थियों को एम.फार्मा और एम.टेक. स्तर पर शोध के लिए मार्गदर्शन दिया है। उनके नाम 250 से अधिक शोध प्रकाशन और 13,288 उद्धरण दर्ज हैं। उनका एच-इंडेक्स 60 और आई-10 इंडेक्स 200 बताया गया है। उन्हें अब तक करीब 30 पुरस्कारों एवं सम्मानों से नवाजा जा चुका है।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साझा किए शोध अनुभव
प्रो. मिश्रा अमेरिका और ब्रिटेन सहित विभिन्न देशों में शैक्षणिक एवं व्यावसायिक मंचों पर व्याख्यान दे चुके हैं। इन मंचों के माध्यम से उन्होंने फार्मेसी और औषधि वितरण से संबंधित शोध अनुभव तथा विशेषज्ञता साझा की है। ‘भैषजी शिक्षा रत्न’ सम्मान को उनकी चार दशक से अधिक की शैक्षणिक सेवा, शोध उपलब्धियों और फार्मेसी शिक्षा में योगदान की महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। उनकी इस उपलब्धि से आईआईटी (बीएचयू) और काशी के शैक्षणिक एवं शोध जगत में प्रसन्नता है।