प्रो. बिहारी लाल शर्मा राधा गोविन्द विश्वविद्यालय के परामर्शदातृ बोर्ड में शामिल, राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा सम्मान
वाराणसी। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) बिहारी लाल शर्मा को एक और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय शैक्षणिक दायित्व मिला है। उन्हें झारखंड स्थित राधा गोविन्द विश्वविद्यालय के प्रशासनिक एवं परामर्शदातृ बोर्ड का सदस्य मनोनीत किया गया है। इस नियुक्ति को न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि, बल्कि सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय की बढ़ती राष्ट्रीय प्रतिष्ठा के रूप में भी देखा जा रहा है।
राधा गोविन्द विश्वविद्यालय, रामगढ़ (झारखंड) की सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी आदेश में प्रो. शर्मा के लंबे शैक्षणिक अनुभव, प्रशासनिक दक्षता, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में योगदान तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन में उनकी सक्रिय भूमिका को ध्यान में रखते हुए यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने विश्वास व्यक्त किया है कि उनके अनुभव और दूरदर्शी नेतृत्व से संस्थान को नई दिशा और ऊर्जा मिलेगी।
राधा गोविन्द विश्वविद्यालय का प्रशासनिक एवं परामर्शदातृ बोर्ड संस्थान के शैक्षणिक विकास, अनुसंधान गतिविधियों के विस्तार, गुणवत्ता संवर्धन और संस्थागत उत्कृष्टता के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह बोर्ड उद्योग जगत, शिक्षण संस्थानों और शोध गतिविधियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के साथ-साथ विश्वविद्यालय की दीर्घकालिक विकास योजनाओं को दिशा देने का कार्य करता है। ऐसे महत्वपूर्ण निकाय में प्रो. शर्मा का शामिल होना उनकी शैक्षणिक प्रतिष्ठा का प्रमाण माना जा रहा है।
प्रो. बिहारी लाल शर्मा भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत साहित्य, शिक्षा प्रशासन और अकादमिक नेतृत्व के क्षेत्र में देश के प्रतिष्ठित विद्वानों में गिने जाते हैं। उन्होंने विभिन्न शैक्षणिक एवं प्रशासनिक पदों पर रहते हुए शिक्षा जगत में उल्लेखनीय योगदान दिया है। वर्तमान में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध, नवाचार और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।
उनके इस मनोनयन की खबर से सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में खुशी का माहौल है। विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने इसे गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कुलपति को बधाई दी है। शिक्षाविदों और संस्कृत जगत से जुड़े विद्वानों का मानना है कि यह नियुक्ति प्रो. शर्मा की विद्वत्ता, प्रशासनिक क्षमता और शिक्षा क्षेत्र में उनके प्रभावशाली योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति है।
विश्वविद्यालय परिवार ने विश्वास व्यक्त किया है कि प्रो. शर्मा अपने नए दायित्व का सफलतापूर्वक निर्वहन करते हुए उच्च शिक्षा, शोध और भारतीय ज्ञान परंपरा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। साथ ही उनके मार्गदर्शन से दोनों विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक सहयोग और ज्ञान विनिमय के नए अवसर भी विकसित होंगे।