राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस पर बीएचयू में गूंजा ‘छात्र शक्ति से राष्ट्र शक्ति’ का संदेश, अभाविप ने आयोजित की संगोष्ठी
वाराणसी। राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के 78वें स्थापना दिवस के अवसर पर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की कला संकाय इकाई द्वारा विद्यार्थी सप्ताह के तहत शनिवार को सरदार पटेल छात्रावास सभागार में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय "अभाविप के 77 वर्ष : छात्र शक्ति से राष्ट्र शक्ति तक" रहा, जिसमें शिक्षकों, पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता पर्यटन विभाग के प्राध्यापक डॉ. अनिल कुमार सिंह ने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद केवल एक छात्र संगठन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की एक सशक्त विचारधारा है। उन्होंने कहा कि पिछले 77 वर्षों में परिषद ने छात्र शक्ति को राष्ट्र शक्ति के रूप में संगठित करने का कार्य किया है। शिक्षा, सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय चेतना और छात्र हितों के लिए परिषद ने निरंतर सक्रिय भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि युवाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करने और उन्हें राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का बोध कराने में अभाविप की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आज भी संगठन विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रीय मूल्यों के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा है।
कार्यक्रम में प्रवासी कार्यकर्ता एवं अभाविप के राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य सर्वेश सिंह ने कहा कि विद्यार्थी परिषद ने स्थापना काल से ही 'राष्ट्र प्रथम' की भावना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि आज देश के विभिन्न क्षेत्रों में परिषद के कार्यकर्ता शिक्षा, सामाजिक सेवा, प्रशासन, राजनीति और अन्य क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा एवं सेवा भाव के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहे हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित न रहें, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी समझें तथा सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनें। उन्होंने कहा कि संगठित छात्र शक्ति देश के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है।
कार्यक्रम में कला संकाय इकाई के उपाध्यक्ष आशीष तथा इकाई सहमंत्री आयुष सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। संगोष्ठी के दौरान छात्र शक्ति, राष्ट्र निर्माण और युवा नेतृत्व जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।