नव संवत्सर पर दशाश्वमेध घाट पर विश्व शांति महायज्ञ, गंगा और सूर्य आरती से गूंजा काशी

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के पावन अवसर पर हिंदू नववर्ष के स्वागत में काशी के दशाश्वमेध घाट पर भव्य धार्मिक आयोजन किया गया। गंगोत्री सेवा समिति और नमामि गंगे के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में विश्व शांति, भारत की सुख-समृद्धि, पर्यावरण संरक्षण और सकारात्मक ऊर्जा के संकल्प के साथ विशेष महायज्ञ, हवन, वैदिक अनुष्ठान और महाआरती संपन्न हुई।
 

वाराणसी। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के पावन अवसर पर हिंदू नववर्ष के स्वागत में काशी के दशाश्वमेध घाट पर भव्य धार्मिक आयोजन किया गया। गंगोत्री सेवा समिति और नमामि गंगे के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में विश्व शांति, भारत की सुख-समृद्धि, पर्यावरण संरक्षण और सकारात्मक ऊर्जा के संकल्प के साथ विशेष महायज्ञ, हवन, वैदिक अनुष्ठान और महाआरती संपन्न हुई।

प्रातःकाल भगवान सूर्य के उदय होते ही वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन शुरू हुआ। श्रद्धालुओं और आचार्यों ने मिलकर विश्व कल्याण, सुख-शांति और आत्मिक जागृति की कामना की। इसके पश्चात भगवान सूर्य नारायण और मां गंगा की विधि-विधान से आरती उतारी गई, जिससे पूरा घाट भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा।

आयोजन के दौरान ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’की भावना के साथ वैश्विक शांति का संदेश दिया गया। वर्तमान समय में विश्व में बढ़ते तनाव, संघर्ष और युद्ध जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए वैदिक अनुष्ठानों के माध्यम से प्रेम, सद्भाव और एकता का आह्वान किया गया।

इस अवसर पर गंगोत्री सेवा समिति के सचिव पं. दिनेश शंकर दुबे, नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक एवं नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला, सिद्धपीठ शीतला मंदिर के उप महंत अवशेष पांडेय सहित कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। साथ ही गंगा आरती के अर्चक और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम में सहभागिता की।

पूरे आयोजन के दौरान घाट पर भक्ति, उत्साह और आध्यात्मिक वातावरण का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने नव संवत्सर के स्वागत को और भी खास बना दिया।