एनडीआरएफ ने 200 नाविकों को दिया प्रशिक्षण, गंगा में डूबने वालों की बचाएंगे जान, लाइफ जैकेट से लेकर सीपीआर तक का कराया अभ्यास

गंगा में डूबने की घटनाओं और जल संबंधी आपात स्थितियों में लोगों की जान बचाने के लिए 11वीं वाहिनी राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) ने शुक्रवार को अस्सी घाट पर सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कमांडिंग ऑफिसर अनूप सिंह बिष्ट के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय नाविकों को जीवन रक्षक कौशल, डूबने से बचाव और प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम से कुल 200 स्थानीय नाविक लाभान्वित हुए।
 

वाराणसी। गंगा में डूबने की घटनाओं और जल संबंधी आपात स्थितियों में लोगों की जान बचाने के लिए 11वीं वाहिनी राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) ने शुक्रवार को अस्सी घाट पर सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कमांडिंग ऑफिसर अनूप सिंह बिष्ट के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय नाविकों को जीवन रक्षक कौशल, डूबने से बचाव और प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम से कुल 200 स्थानीय नाविक लाभान्वित हुए।

कार्यक्रम का उद्देश्य गंगा में होने वाली दुर्घटनाओं के दौरान नाविकों की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाना और उन्हें उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करते हुए लोगों की जान बचाने के लिए तैयार करना था। एनडीआरएफ के कार्मिकों ने नाविकों को विभिन्न जल बचाव तकनीकों की जानकारी देने के साथ उनका व्यावहारिक प्रशिक्षण भी कराया।

लाइफ जैकेट और रस्सियों के इस्तेमाल का प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दौरान नाविकों को तैराक और गैर-तैराक व्यक्तियों को सुरक्षित बचाने के तरीके बताए गए। इसके साथ ही लाइफ बॉय, लाइफ जैकेट और रस्सियों के प्रभावी इस्तेमाल की जानकारी दी गई। उपलब्ध संसाधनों की मदद से अस्थायी तैरने वाले उपकरण और स्ट्रेचर तैयार करने की विधियां भी समझाई गईं, ताकि आपात स्थिति में घायल या डूबने से प्रभावित व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

सीपीआर और प्राथमिक उपचार की दी जानकारी
एनडीआरएफ की टीम ने डूबने से प्रभावित व्यक्ति को प्राथमिक उपचार देने, कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर), रक्तस्राव नियंत्रित करने और सर्पदंश की स्थिति में प्राथमिक उपचार के उपायों की जानकारी दी। नाविकों को बताया गया कि दुर्घटना के समय घबराने के बजाय सूझबूझ और प्रशिक्षित तरीके से कार्रवाई करना महत्वपूर्ण है।

इसके अतिरिक्त, प्रतिभागियों को आकाशीय बिजली से संबंधित पूर्व चेतावनी प्राप्त करने के लिए दामिनी ऐप और आपदा संबंधी चेतावनियों एवं अलर्ट के लिए सचेत ऐप की उपयोगिता के बारे में भी बताया गया। इन डिजिटल माध्यमों के जरिए मौसम और आपदा संबंधी चेतावनियों के प्रति सतर्क रहने के लिए प्रेरित किया गया।

प्रशिक्षण के बाद प्रमाण-पत्र वितरित
कार्यक्रम के समापन पर 11वीं वाहिनी एनडीआरएफ के कमांडिंग ऑफिसर अनूप सिंह बिष्ट और उप जिलाधिकारी (सदर), वाराणसी ने प्रतिभागी नाविकों को प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र, टी-शर्ट और खाद्य पैकेट वितरित किए। एनडीआरएफ अधिकारियों ने नाविकों को गंगा घाट पर आने वाले श्रद्धालुओं और आम नागरिकों की सुरक्षा में सक्रिय सहयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने सामुदायिक सहभागिता और आपदा से पहले तैयारी को मजबूत बनाने में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की अहम भूमिका पर जोर दिया।