मानव एकता दिवस पर करुणा और सेवा का संदेश, वाराणसी में 466 यूनिट रक्तदान

करुणा, प्रेम और सह-अस्तित्व के मूल्यों को समर्पित ‘मानव एकता दिवस’ के अवसर पर वाराणसी सहित पूरे देश में सेवा और समर्पण का अनूठा उदाहरण देखने को मिला। युगप्रवर्तक बाबा गुरबचन सिंह जी की स्मृति में आयोजित इस दिवस ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि मानवता की सच्ची पहचान परोपकार और निष्काम सेवा में निहित है। इस दौरान 466 यूनिट रक्तदान किया गया। 
 

वाराणसी। करुणा, प्रेम और सह-अस्तित्व के मूल्यों को समर्पित ‘मानव एकता दिवस’ के अवसर पर वाराणसी सहित पूरे देश में सेवा और समर्पण का अनूठा उदाहरण देखने को मिला। युगप्रवर्तक बाबा गुरबचन सिंह जी की स्मृति में आयोजित इस दिवस ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि मानवता की सच्ची पहचान परोपकार और निष्काम सेवा में निहित है। इस दौरान 466 यूनिट रक्तदान किया गया। 

वाराणसी में ब्लड बैंक की अहम भूमिका, 466 यूनिट रक्त संग्रह
मलदहिया स्थित ब्रांच में आयोजित रक्तदान शिविर इस अभियान का प्रमुख केंद्र रहा, जहां विभिन्न ब्लड बैंकों और अस्पतालों की सक्रिय भागीदारी ने इसे सफल बनाया। सर सुंदर लाल चिकित्सालय, पंडित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल, श्री शिव प्रसाद गुप्त अस्पताल एवं महामना कैंसर अस्पताल की टीमों ने मिलकर रक्तदाताओं की स्वास्थ्य जांच के बाद सुरक्षित रूप से रक्त संग्रह किया।

इन सभी ब्लड बैंकों के समन्वित प्रयास से कुल 466 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया, जो जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवनदायिनी साबित होगा। अनुभवी चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित, सुरक्षित और प्रभावी ढंग से संपन्न कराया। इस दौरान स्वच्छता, सतर्कता और सेवा-भाव का विशेष ध्यान रखा गया।

संत निरंकारी मंडल वाराणसी जोन के जोनल इंचार्ज सिद्धार्थ शंकर सिंह ने बताया कि देशभर में करीब 200 स्थानों पर रक्तदान शिविर आयोजित किए गए, जिनमें लगभग 40 हजार यूनिट रक्त संकलित हुआ। यह पहल मानवता के प्रति समर्पण और सेवा-भाव का सशक्त उदाहरण है।

सेवा की परंपरा का विस्तार
मानव एकता दिवस के माध्यम से वर्षभर चलने वाले सेवा अभियानों की शुरुआत भी हुई। जानकारी के अनुसार, देशभर में लगभग 705 स्थानों पर रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे। पिछले चार दशकों में निरंकारी मिशन द्वारा 9,174 शिविरों के माध्यम से 15 लाख से अधिक यूनिट रक्त संग्रह किया जा चुका है।

बाबा गुरबचन सिंह जी ने जहां सत्य, सरलता और सद्भाव का संदेश दिया, वहीं बाबा हरदेव सिंह जी ने “रक्त नाड़ियों में बहे, नालियों में नहीं” का आह्वान कर सेवा को जन-आंदोलन का रूप दिया। वर्तमान में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए समाज को सेवा और एकता के मार्ग पर प्रेरित कर रही हैं।