27 करोड़ गायत्री मंत्र जप के साथ संपन्न हुआ महायज्ञ, महामंडलेश्वर प्रखर महाराज का काशी में अभिनंदन
वाराणसी। श्रृंगेरी शंकराचार्य मठ, महमूरगंज में रविवार को ब्रह्मातीर्थ पुष्कर (राजस्थान) में आयोजित शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ की सफल पूर्णाहुति के उपरांत महामंडलेश्वर यज्ञसम्राट स्वामी प्रखर महाराज के काशी आगमन पर भव्य अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में काशी के विद्वानों, संत-महात्माओं एवं विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने उनका सम्मान किया।
समारोह का शुभारंभ चारों वेदों की विभिन्न शाखाओं से जुड़े वैदिक विद्वानों के मंगलाचरण से हुआ। इसके बाद स्वामी प्रखर महाराज, स्वामी गोविन्दानन्द, सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलसचिव राकेश कुमार (आईएएस) तथा अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
महायज्ञ के यजमान एवं विद्वान प्रो. कमलाकान्त त्रिपाठी ने पुष्कर में आयोजित यज्ञ के आध्यात्मिक अनुभवों को साझा करते हुए इसे अद्वितीय बताया। वहीं यज्ञाचार्य पंडित सुनील दीक्षित ने कहा कि उन्होंने अनेक याज्ञिक अनुष्ठानों का संचालन किया है, लेकिन इतनी शुचिता, अनुशासन और शास्त्रीय विधि से संपन्न महायज्ञ दुर्लभ है।
मुख्य वक्ता स्वामी प्रखर महाराज ने बताया कि इस महायज्ञ में 27 करोड़ गायत्री मंत्रों का जप त्रिकाल संध्यानिष्ठ ब्राह्मणों और यजमानों के सहयोग से संपन्न हुआ। उन्होंने कहा कि यह आयोजन सनातन धर्म की प्रतिष्ठा, विश्व शांति और मानव कल्याण के उद्देश्य से किया गया। विशेष बात यह रही कि महायज्ञ का संचालन मुख्य रूप से ब्राह्मण समाज के सहयोग से संपन्न हुआ, जिसमें देश-विदेश के श्रद्धालुओं और विद्वानों ने योगदान दिया।
स्वामी प्रखर महाराज ने बताया कि महर्षि विश्वामित्र के शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ से प्रेरित इस आयोजन को शास्त्रोक्त परंपराओं के अनुरूप संपन्न कराया गया। उन्होंने यह भी कहा कि इस आयोजन ने ब्राह्मण समाज में संध्या-वंदन और गायत्री साधना के प्रति निष्ठा को मजबूत करने का कार्य किया है।
कार्यक्रम में बताया गया कि महायज्ञ से जुड़े विभिन्न आयामों को लेकर 12 विश्व रिकॉर्ड भी दर्ज किए गए हैं। समारोह में काशी के अनेक विद्वान, वैदिक आचार्य, गणमान्य नागरिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। अंत में शांति पाठ और प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।