सेवापुरी महिला महाविद्यालय में मधुबनी पेंटिंग कार्यशाला, छात्राओं ने सीखी लोककला की बारीकियां
वाराणसी। जिले के सेवापुरी ब्लॉक अंतर्गत भीषमपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय महिला महाविद्यालय सेवापुरी में शुक्रवार को एक दिवसीय मधुबनी पेंटिंग प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। मिथिला की विश्वप्रसिद्ध लोकचित्रकला ‘मधुबनी’ पर आधारित इस कार्यशाला में छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए पारंपरिक कला की बारीकियों को सीखा और अपनी सृजनात्मक प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
कार्यशाला में मधुबनी चित्रकला विशेषज्ञ एवं इलाहाबाद विश्वविद्यालय के फैशन टेक्नोलॉजी संकाय की डॉ. सृष्टि पुरवार तथा बसंत कन्या महाविद्यालय की प्रो. संगीता देवडिया ने प्रशिक्षक के रूप में मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने छात्राओं को मधुबनी कला के ऐतिहासिक विकास, पारंपरिक रंगों के प्रयोग, प्राकृतिक तत्वों से रंग निर्माण, विशिष्ट रेखांकन शैली और प्रतीकों के सांस्कृतिक महत्व की विस्तृत जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि मधुबनी पेंटिंग केवल चित्रकारी नहीं, बल्कि भारतीय लोकजीवन, आस्था, प्रकृति और सामाजिक परंपराओं की जीवंत अभिव्यक्ति है।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान छात्राओं ने कार्ड, कपड़े, बैग, थैला और रूमाल आदि पर मधुबनी शैली में आकर्षक चित्रांकन किया। पारंपरिक आकृतियों जैसे सूर्य, चंद्रमा, मछली, मोर और पौराणिक प्रसंगों को अपने चित्रों में उकेरते हुए छात्राओं ने कला के प्रति गहरी रुचि दिखाई। कार्यशाला स्थल पर रंगों और रचनात्मकता का अनूठा संगम देखने को मिला।
प्रो. संगीता देवडिया ने अपने संबोधन में कहा कि मधुबनी जैसी पारंपरिक कला को अपनाकर छात्राएं न केवल भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में योगदान दे सकती हैं, बल्कि इसे स्वरोजगार का माध्यम बनाकर आत्मनिर्भर भी बन सकती हैं। उन्होंने हस्तनिर्मित उत्पादों की बाजार में बढ़ती मांग का उल्लेख करते हुए छात्राओं को उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. सुधा पांडेय के संरक्षण तथा गृहविज्ञान विभाग की डॉ. सुधा तिवारी के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. साधना अग्रवाल (डीएलडब्ल्यू, वाराणसी) उपस्थित रहीं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रशिक्षण कार्यशालाएं छात्राओं के व्यक्तित्व विकास, कौशल संवर्धन और आत्मविश्वास बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कार्यक्रम की सफलता में महाविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों का सक्रिय योगदान रहा। बड़ी संख्या में छात्राओं और शिक्षिकाओं की उपस्थिति से कार्यशाला प्रेरणादायी और ज्ञानवर्धक साबित हुई। अंत में प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान कर उनके उत्साह की सराहना की गई।