बनारस में लस्सी का जलवा: दही और सत्तू की ठंडी घूंट से मिल रही गर्मी में राहत
वाराणसी। गर्मी बढ़ते ही काशी में देसी पेयों की मांग भी तेज हो गई है और इस बार दही व सत्तू की लस्सी लोगों की पहली पसंद बनकर उभरी है। तपती धूप में जहां लोग राहत की तलाश में हैं, वहीं यह पारंपरिक पेय स्वाद और सेहत दोनों का बेहतरीन संगम साबित हो रहा है।
गर्मी में देसी ठंडक का सबसे भरोसेमंद सहारा
वाराणसी की गलियों और बाजारों में इन दिनों लस्सी की दुकानों पर खासा जमावड़ा देखने को मिल रहा है। लोग ठंडी-ठंडी लस्सी पीकर न सिर्फ गर्मी से राहत पा रहे हैं, बल्कि शरीर को जरूरी ऊर्जा भी दे रहे हैं। खासकर दोपहर के समय लस्सी की मांग सबसे ज्यादा बढ़ जाती है।
नमकीन लस्सी से पाचन दुरुस्त
दही से बनी नमकीन लस्सी में जीरा, काला नमक, हरा धनिया, हरी मिर्च और हींग जैसे मसालों का इस्तेमाल किया जाता है। यह मिश्रण न सिर्फ स्वाद को बढ़ाता है बल्कि पाचन क्रिया को भी बेहतर बनाता है। पेट की समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए यह काफी फायदेमंद माना जाता है।
मीठी लस्सी से डिहाइड्रेशन से बचाव
मीठी लस्सी शरीर में पानी की कमी को दूर करने में मदद करती है। गर्मी में जब शरीर जल्दी डिहाइड्रेट होता है, तब यह पेय शरीर को ठंडक और संतुलन प्रदान करता है। यही कारण है कि बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक इसे पसंद कर रहे हैं।
सत्तू की लस्सी बनी खास पसंद
काशी में सत्तू की लस्सी का भी अलग ही क्रेज देखने को मिल रहा है। शहर के कई इलाकों में सत्तू की नमकीन लस्सी आसानी से मिल जाती है। यह शरीर को तुरंत तरावट देती है और लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने में मदद करती है।
आयुर्वेद भी मानता है फायदेमंद
आयुर्वेद के अनुसार लस्सी का सेवन व्यक्ति की प्रकृति और स्वास्थ्य के अनुसार करना चाहिए। सत्तू की लस्सी में प्रोटीन और जरूरी खनिज तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को ताकत देते हैं। वहीं मीठी लस्सी वजन और ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्याओं में भी लाभकारी मानी जाती है।
स्वाद के साथ सेहत का भी ख्याल
गर्मी के इस मौसम में लस्सी केवल एक पेय नहीं, बल्कि सेहत का साथी बनकर उभर रही है। काशी की यह देसी परंपरा आज भी लोगों को ठंडक और ताजगी देने में सबसे आगे है।