पट्टाभिषेक के साथ राजसिंहासन पर विराजे राजाधिराज श्रीराम, जयकारों से गूंज उठा काशी का केदार खंड
वाराणसी। काशी के केदार खंड स्थित श्री राम तारक आंध्र आश्रम में वेद मंत्रों की गूंज और भक्ति के अद्भुत माहौल के बीच भगवान श्रीराम का भव्य पट्टाभिषेक कर उन्हें राजसिंहासन पर विराजमान किया गया। इस दौरान पूरा मानसरोवर तीर्थ क्षेत्र “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंज उठा और श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए।
वेद मंत्रों के बीच हुआ दिव्य अभिषेक और राज्यारोहण
द्वादश दिवसीय श्री राम साम्राज्य पट्टाभिषेक महोत्सव के दसवें दिन वैदिक विधि-विधान से भगवान श्रीराम का अभिषेक किया गया। देश की पवित्र नदियों और सागर के जल से मस्तकाभिषेक के बाद सभी धार्मिक प्रक्रियाएं पूर्ण कर भगवान श्रीराम और माता सीता को राजसी वस्त्रों में सुसज्जित कर सिंहासन पर आरूढ़ कराया गया। इस दौरान वैदिक विद्वानों के मंत्रोच्चार से पूरा आश्रम परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
आचार्य सोमायजुलू के निर्देशन में सम्पन्न हुआ अनुष्ठान
महोत्सव के मुख्य आचार्य उलिमिरी सोमायजुलू के निर्देशन में सभी अनुष्ठान विधिवत सम्पन्न हुए। उन्होंने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य देश में सुख-शांति और समृद्धि की कामना करना है। साथ ही यह भी जानकारी दी कि चार वर्षों के क्रम के बाद पांचवें वर्ष महापट्टाभिषेक का विशेष आयोजन किया जाता है।
मुख्य यजमान ने पूर्ण किए सभी धार्मिक अनुष्ठान
आंध्र आश्रम के मैनेजिंग ट्रस्टी वीवी सुंदर शास्त्री ने मुख्य यजमान के रूप में अभिषेक, पूजन और आहुति सहित सभी अनुष्ठानों को पूर्ण कराया। श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति के बीच यह आयोजन भव्य और दिव्य स्वरूप में सम्पन्न हुआ।
कल होंगे विशेष अनुष्ठान: कुंकुमार्चन और तुलसी अर्चन
महोत्सव के अगले चरण में रविवार को माता सीता का लक्ष कुंकुमार्चन तथा भगवान श्रीराम का लक्ष तुलसीदल अर्चन अनुष्ठान आयोजित किया जाएगा। इन विशेष अनुष्ठानों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
रंगारंग कार्यक्रम और सम्मान समारोह का आयोजन
उत्सव के तहत संध्या समय एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें महोत्सव में योगदान देने वाले आचार्यों और रामायण विद्वानों का सम्मान किया जाएगा। इस समारोह में अन्नपूर्णा मंदिर के महंत शंकर पुरी जी महाराज मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।
देशभर से आए विद्वानों की रही उपस्थिति
कार्यक्रम में सी वी बी सुब्रह्मण्यम, चेनुलु, विरूपाक्ष मूर्ति, शेखर द्रविड़, अनंत गुरुजी, शिव शर्मा, वेमुरी उमा, धारणिया, रुक्मिणी और सुजाता सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। पूरे आयोजन ने काशी में भक्ति और परंपरा का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।