काशी विद्यापीठ में रूसी भाषा के साथ साहित्य की पाठशाला, छात्रों ने पढ़ी येसेनिन की कविता
वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में चल रहे रूसी भाषा एवं संस्कृति कार्यक्रम के 11वें दिन मंगलवार को विद्यार्थियों ने रूसी साहित्य के साथ भाषा और व्याकरण की बारीकियां सीखीं। एडवांस डिप्लोमा और डिप्लोमा के विद्यार्थियों ने प्रसिद्ध रूसी कवि सर्गेई अलेक्सांद्रोविच येसेनिन की कविता का सस्वर पाठ किया। वहीं प्रारंभिक स्तर के विद्यार्थियों को रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाले रूसी शब्द और सर्वनाम का प्रयोग सिखाया गया।
अंग्रेजी एवं अन्य विदेशी भाषा विभाग और रूस के कोज्मा मीनिन स्टेट पेडगॉजिकल यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में रूसी शिक्षिका प्रो. नतालिया ने विद्यार्थियों को साहित्य के माध्यम से भाषा समझाने का प्रयास किया। कक्षा की शुरुआत पिछली कक्षा में पढ़ाई गई कविता के अभ्यास से हुई। प्रो. नतालिया ने पहले स्वयं लय और भाव के साथ कविता का पाठ किया। इसके बाद विद्यार्थियों ने बारी-बारी से कविता पढ़ी।
उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि कविता पढ़ते समय केवल शब्दों का सही उच्चारण ही नहीं, बल्कि उसके भाव और लय को समझना भी जरूरी है। खुशी या दुख, कविता में जो भी भाव मौजूद हो, पाठ करते समय उसकी अभिव्यक्ति होनी चाहिए।
'हे मेरी मातृभूमि, मेरी रूस' कविता का कराया पाठ
इसके बाद विद्यार्थियों को सर्गेई येसेनिन की कविता 'हे मेरी मातृभूमि, मेरी रूस' पढ़ाई गई। प्रो. नतालिया ने बताया कि येसेनिन को अपनी मातृभूमि से गहरा लगाव था और उनकी यह भावना कविता के शब्दों में दिखाई देती है। विद्यार्थियों के लिए यह अब तक पढ़ाई गई कठिन कविताओं में से एक रही। इसके माध्यम से उन्हें कई नए रूसी शब्द और उनके अर्थ जानने का मौका मिला।
कविता के पाठ के बाद प्रत्येक पंक्ति का व्याकरण के आधार पर विश्लेषण किया गया। विद्यार्थियों से शब्दों के लिंग, संज्ञा रूप और कारक के बारे में सवाल किए गए। जहां विद्यार्थियों को परेशानी हुई, वहां प्रो. नतालिया ने उदाहरण देकर नियमों को समझाया। विद्यार्थियों के काव्य पाठ का वीडियो भी रिकॉर्ड किया गया।
कक्षा के अंतिम हिस्से में विद्यार्थियों ने पहले पढ़े गए टंग ट्विस्टर्स का अभ्यास किया। इसके साथ एक नया टंग ट्विस्टर भी सिखाया गया, जिससे रूसी शब्दों के सही उच्चारण का अभ्यास कराया गया।
शुरुआती विद्यार्थियों ने सीखे रोजमर्रा के रूसी शब्द
वहीं प्रारंभिक स्तर के विद्यार्थियों की कक्षा डॉ. दारिया ने ली। उन्होंने रोजमर्रा की दिनचर्या में इस्तेमाल होने वाले संज्ञा शब्दों को रूसी भाषा में बोलना, पढ़ना और लिखना सिखाया। इसके साथ ही संज्ञा के साथ सर्वनाम के प्रयोग के नियम भी समझाए।
उन्होंने बताया कि रूसी भाषा में 'यह' और 'वह' जैसे सर्वनामों का प्रयोग संज्ञा के लिंग और उसके स्वरूप के अनुसार बदलता है। विद्यार्थियों को अलग-अलग संज्ञाओं के साथ सही सर्वनाम चुनने का अभ्यास कराया गया, ताकि वे रोजमर्रा की बातचीत में इनका सही इस्तेमाल कर सकें।
कार्यक्रम में साहित्य, व्याकरण और बोलचाल को एक साथ जोड़कर रूसी भाषा का अभ्यास कराया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल रूसी भाषा के नियम सिखाना नहीं, बल्कि उन्हें रूस के साहित्य और संस्कृति से भी परिचित कराना है।