BHU में अंतर-संकाय शतरंज प्रतियोगिता शुरू, पुरुष वर्ग में 10 और महिला वर्ग में 11 टीमें मैदान में

वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में अंतर-संकाय शतरंज (पुरुष एवं महिला) प्रतियोगिता 2026-27 शुरू हो गई है। तीन दिवसीय प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के छात्र-छात्राएं हिस्सा ले रहे हैं। पुरुष वर्ग में 10 और महिला वर्ग में 11 टीमें मैदान में हैं।
 

वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में अंतर-संकाय शतरंज (पुरुष एवं महिला) प्रतियोगिता 2026-27 शुरू हो गई है। तीन दिवसीय प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के छात्र-छात्राएं हिस्सा ले रहे हैं। पुरुष वर्ग में 10 और महिला वर्ग में 11 टीमें मैदान में हैं।

विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद के तत्वावधान में प्रतियोगिता का आयोजन 14 से 16 सितंबर तक सेमिनार हॉल (यूएसबी), बीएचयू में किया जा रहा है। पुरुष और महिला दोनों वर्गों में कुल चार-चार चक्र खेले जाने हैं। प्रतियोगिता के पहले दिन दोनों वर्गों में एक-एक चक्र खेला गया। दूसरे दिन दो चक्र और अंतिम दिन एक चक्र आयोजित किया जाएगा।

प्रतियोगिता के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि यूनिवर्सिटी हेल्थ सेंटर कॉम्प्लेक्स के सीएमओ आरपी सेन, विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद की उपाध्यक्ष प्रो. अर्चना सिंह, महासचिव प्रो. एके नेमा और आयोजन सचिव डॉ. प्रदीप खलको मौजूद रहे।

इस दौरान डिप्टी डायरेक्टर डॉ. खुर्शीद अहमद और डॉ. धीरेंद्र तिवारी के साथ असिस्टेंट डायरेक्टर डॉ. रोबिन सिंह, डॉ. वैभव राय, डॉ. प्रमोद यादव, डॉ. प्रियंका यादव और डॉ. हरिराम यादव मौजूद रहे। सेक्रेटरी डॉ. कविता वर्मा एवं डॉ. दीपक डोगरा ने भी प्रतियोगिता में अपनी जिम्मेदारी निभाई।

विभिन्न संकायों के स्पोर्ट्स इंचार्ज के रूप में आरजीएससी से डॉ. किरण आर्या, शिक्षा संकाय से प्रो. संजय सोनकर, विज्ञान संस्थान से प्रो. निर्मल होरो और डीएवी से प्रो. मिनू लकड़ा उपस्थित रहे। शतरंज के चेयरमैन प्रो. श्रेष्ठ यादव भी आयोजन में मौजूद रहे।

प्रतियोगिता में चीफ आर्बिटर की जिम्मेदारी साहब अहमद फारूकी संभाल रहे हैं। उनके साथ सुजीत चौधरी और ऋषि पांडेय निर्णायक मंडल में शामिल हैं। आयोजन में स्टाफ सदस्य राजेश कश्यप, प्रहलाद, राजकुमार, विजय और बहादुर के साथ ग्राउंड स्टाफ के शीतला, राजेंद्र एवं नरेश सहयोग कर रहे हैं।

आयोजकों के अनुसार प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में खेल भावना के साथ तार्किक एवं रणनीतिक सोच को बढ़ावा देना है। तीन दिनों तक चलने वाले मुकाबलों में खिलाड़ी अपनी एकाग्रता, धैर्य, रणनीति और शतरंज कौशल का प्रदर्शन करेंगे। अंतिम दिन चार चक्र पूरे होने के बाद प्रतियोगिता का समापन होगा।