लंका में प्यासे राहगीर, महीनों से बंद पड़ा इंडिया ओवरसीज बैंक का वाटर कूलर, रखरखाव पर उठे सवाल
वाराणसी। भीषण गर्मी और उमस के बीच जहां शहर में लोगों को स्वच्छ एवं शीतल पेयजल उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न संस्थाओं द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर वाटर कूलर लगाए गए हैं, वहीं लंका क्षेत्र में इंडिया ओवरसीज बैंक की ओर से स्थापित एक वाटर कूलर लंबे समय से बंद पड़ा है। इसके कारण स्थानीय नागरिकों, राहगीरों, मरीजों के तीमारदारों, छात्रों और काशी आने वाले श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि जनहित में शुरू की गई यह सुविधा रखरखाव के अभाव में अब केवल शोपीस बनकर रह गई है।
लंका स्थित शिव मंदिर के नीचे लगाया गया यह वाटर कूलर कभी राहगीरों के लिए बड़ी राहत का माध्यम था। क्षेत्र में प्रतिदिन हजारों लोगों का आवागमन रहता है। आसपास अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, धार्मिक स्थल और बाजार होने के कारण यहां सुबह से देर शाम तक लोगों की भीड़ लगी रहती है। ऐसे में गर्मी के मौसम में ठंडे और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था बेहद जरूरी मानी जाती है। लेकिन वाटर कूलर बंद होने के कारण लोगों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इंडिया ओवरसीज बैंक ने सामाजिक दायित्व के तहत इस वाटर कूलर की स्थापना कर सराहनीय पहल की थी। शुरुआत में लोगों को इसका भरपूर लाभ मिला, लेकिन कुछ समय बाद यह तकनीकी कारणों से बंद हो गया। अब काफी समय बीत जाने के बावजूद इसकी मरम्मत नहीं कराई गई है। लोगों का कहना है कि खराबी तकनीकी है या किसी अन्य कारण से मशीन बंद हुई है, इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है, लेकिन लंबे समय से यह सुविधा ठप पड़ी होने से इसका उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है।
क्षेत्रीय नागरिकों का मानना है कि केवल जनसुविधाओं की स्थापना करना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उनका नियमित रखरखाव, समय-समय पर निरीक्षण और खराब होने पर तत्काल मरम्मत भी उतनी ही आवश्यक है। यदि इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो जनहित में खर्च की गई राशि और संसाधनों का लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच पाएगा।
स्थानीय लोगों ने इंडिया ओवरसीज बैंक और संबंधित विभाग से मांग की है कि बंद पड़े वाटर कूलर की शीघ्र मरम्मत कर उसे दोबारा चालू कराया जाए। साथ ही शहर के अन्य सार्वजनिक स्थलों पर लगाए गए वाटर कूलरों का भी नियमित निरीक्षण और रखरखाव सुनिश्चित किया जाए, ताकि भीषण गर्मी के दौरान राहगीरों, मरीजों के परिजनों, छात्रों और श्रद्धालुओं को निर्बाध रूप से स्वच्छ एवं ठंडा पेयजल उपलब्ध हो सके। उनका कहना है कि जनसुविधाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब वे लगातार सुचारु रूप से संचालित होती रहें।