सीर गोवर्धनपुर गेट पर कूड़ा गाड़ियों का जाम, राहगीरों की बढ़ी मुसीबत
टोल टैक्स बचाने के लिए शहर के भीतर से गाड़ियां गुजारने का आरोप, स्कूली बच्चों और मरीजों को रोजाना हो रही परेशानी
वाराणसी। सीर गोवर्धनपुर गेट पर जाम की समस्या स्थानीय लोगों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। यहां से गुजरने वाले राहगीरों को आए दिन घंटों जाम में फंसना पड़ता है। स्थानीय निवासियों ने नगर निगम की कूड़ा गाड़ियों के लगातार आवागमन को यातायात बाधित होने का प्रमुख कारण बताया है। उनका आरोप है कि टोल टैक्स बचाने के लिए इन गाड़ियों को शहर के अंदर से गुजारा जा रहा है, जिससे आम लोगों की मुश्किलें बढ़ रही हैं।
स्थानीय निवासी अमन यादव के अनुसार, डाफी बाईपास से आने वाले चार पहिया वाहनों के लिए सीर गोवर्धनपुर गेट महत्वपूर्ण मार्ग है। इस रास्ते से बीएचयू अस्पताल तक पहुंचना आसान होता है, लेकिन नगर निगम की कूड़ा गाड़ियों के कारण यहां अक्सर जाम लग जाता है। उनका आरोप है कि ये गाड़ियां शहर के अंदर से होते हुए सीर गेट, रविदास मंदिर और फिर बाईपास व छित्तूपुर गेट की ओर जाती हैं। इससे सड़क पर वाहनों का दबाव बढ़ जाता है और आवागमन प्रभावित होता है।
अमन यादव का कहना है कि यदि कूड़ा गाड़ियों के लिए बाईपास से आवागमन की व्यवस्था की जाए तो सीर गेट पर लगने वाले जाम से काफी राहत मिल सकती है। स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि कूड़ा गाड़ियों से निकलने वाली दुर्गंध के कारण आसपास रहने वालों और सड़क से गुजरने वाले लोगों को परेशानी होती है। उनका कहना है कि कई बार इस समस्या को उठाया गया, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
जल्दबाजी में वाहन चलाने का भी आरोप
स्थानीय निवासी लाल बहादुर यादव ने आरोप लगाया कि विरोध के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। उनके मुताबिक, कुछ ट्रक चालक जल्दबाजी में वाहन चलाते हैं और आसपास से गुजर रहे लोगों का पर्याप्त ध्यान नहीं रखते। इससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
स्कूली बच्चों और मरीजों की बढ़ी परेशानी
जाम का सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों, महिलाओं, मरीजों और अस्पताल जाने वाले तीमारदारों पर पड़ रहा है। लोगों को समय पर गंतव्य तक पहुंचने में कठिनाई होती है। स्थानीय निवासियों ने संबंधित अधिकारियों से कूड़ा गाड़ियों के लिए उचित मार्ग निर्धारित करने, यातायात व्यवस्था सुधारने और चालकों की निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की है। अब देखना है कि जिम्मेदार विभाग इस समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाते हैं।