बदलते मौसम में बढ़ी बुखार-जोड़ों के दर्द के मरीजों की तादाद, अस्पतालों के ओपीडी में बढ़ी भीड़ 

मौसम में तेजी से हो रहे बदलाव के बीच वाराणसी में मौसमी और संक्रामक बीमारियों का प्रकोप बढ़ता दिखाई दे रहा है। तापमान में उतार-चढ़ाव और वातावरण में बढ़ी नमी के कारण वायरल संक्रमण समेत बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द और कमजोरी की शिकायत लेकर बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। कई परिवारों में एक से अधिक सदस्य बीमारी की चपेट में आने की बात सामने आ रही है।
 

वाराणसी। मौसम में तेजी से हो रहे बदलाव के बीच वाराणसी में मौसमी और संक्रामक बीमारियों का प्रकोप बढ़ता दिखाई दे रहा है। तापमान में उतार-चढ़ाव और वातावरण में बढ़ी नमी के कारण वायरल संक्रमण समेत बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द और कमजोरी की शिकायत लेकर बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। कई परिवारों में एक से अधिक सदस्य बीमारी की चपेट में आने की बात सामने आ रही है।

जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 300 से अधिक मरीज बुखार, सिरदर्द और बदन दर्द की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार कुछ मरीजों में चिकनगुनिया और टाइफाइड जैसे रोगों से मिलते-जुलते लक्षण दिखाई दे रहे हैं। ऐसे मामलों में आवश्यक जांच के बाद उपचार किया जा रहा है।

एक दिन में 3156 मरीज पहुंचे अस्पताल
शुक्रवार को मंडलीय अस्पताल, जिला अस्पताल, रामनगर स्थित लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल समेत जिले के सीएचसी, पीएचसी और निजी अस्पतालों में कुल 3156 मरीजों का उपचार किया गया। इनमें 330 मरीज बुखार और जोड़ों में दर्द की शिकायत लेकर पहुंचे।

इसके अलावा करीब 50 बच्चों में बुखार के साथ पेट संबंधी समस्याएं भी सामने आईं। चिकित्सकों के मुताबिक बच्चों में बुखार के साथ सर्दी-खांसी, कमजोरी और शरीर में पानी की कमी जैसी शिकायतें भी देखी जा रही हैं।

7 से 10 दिन तक बना रह रहा बुखार
चिकित्सकों के अनुसार मौसम में बदलाव के साथ वायरस और बैक्टीरिया के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ओपीडी में आने वाले कई मरीजों ने सात से दस दिनों तक तेज बुखार बने रहने की शिकायत की है। इसके साथ सिरदर्द, बदन दर्द और कमजोरी की समस्या भी बनी रह रही है।
चिकित्सकों का कहना है कि मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों के अलावा दूषित पानी और संक्रमित खाद्य पदार्थों से होने वाले संक्रमण से भी सावधानी जरूरी है। लक्षणों के आधार पर मरीजों को आवश्यक जांच कराने की सलाह दी जा रही है।

बच्चे और बुजुर्ग अधिक प्रभावित
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. मनीष यादव के अनुसार मौसम परिवर्तन का असर सभी आयु वर्ग पर पड़ रहा है, लेकिन बच्चे और बुजुर्ग अपेक्षाकृत अधिक प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने लगातार बुखार रहने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा लेने से बचने और समय पर जांच कराने की सलाह दी।
मंडलीय अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सीपी गुप्ता ने बताया कि बच्चों में बुखार, सर्दी-खांसी और डिहाइड्रेशन की शिकायत बढ़ रही है। अभिभावकों को बच्चों के खानपान और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

फॉगिंग और एंटी-लार्वा अभियान तेज
बढ़ते मरीजों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों में आवश्यक दवाओं, बेड और जांच किट की उपलब्धता सुनिश्चित करने का दावा किया है। सीएमओ डॉ. मुकेश कुमार के अनुसार संवेदनशील इलाकों में फॉगिंग और एंटी-लार्वा छिड़काव तेज किया गया है। मच्छरों के प्रजनन स्थलों को चिह्नित कर उन्हें नष्ट करने के साथ लोगों को आसपास पानी जमा नहीं होने देने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

चिकित्सकों ने लोगों से साफ और सुरक्षित पानी पीने, खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से बचने, नियमित हाथ धोने और मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाने की अपील की है। तेज बुखार कई दिनों तक बना रहे, जोड़ों में अधिक दर्द हो या बच्चे में सुस्ती और पानी की कमी के लक्षण दिखाई दें तो समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की बात कही गई है।