संकुलधारा पोखरा में मर रहीं मछलियां, जलीय जीवों की सुरक्षा और जल की गुणवत्ता पर सवाल, पीएम के संसदीय कार्यालय में शिकायत के बावजूद नहीं हुई कोई कार्रवाई
वाराणसी। भेलूपुर थाना क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक एवं पौराणिक संकुलधारा पोखरा में पिछले कई महीनों से बड़ी संख्या में मछलियों की लगातार हो रही मौत ने स्थानीय लोगों, पर्यावरण प्रेमियों और समाजसेवियों की चिंता बढ़ा दी है। प्रतिदिन तालाब में मृत मछलियां पानी की सतह पर तैरती दिखाई दे रही हैं, जिससे न केवल जलाशय का वातावरण दूषित हो रहा है बल्कि पूरे क्षेत्र में दुर्गंध भी फैलने लगी है। पीएम के संसदीय कार्यालय में शिकायत के बावजूद कोई ठोस पहल नहीं की गई।
लोगों के अनुसार, सुबह होते ही तालाब में बड़ी संख्या में मृत मछलियां दिखाई देती हैं। सफाईकर्मी उन्हें निकालकर बाहर फेंक देते हैं, लेकिन अगले ही दिन फिर वही स्थिति देखने को मिलती है। लगातार हो रही इस घटना ने तालाब के जल की गुणवत्ता और उसमें रहने वाले अन्य जलीय जीवों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि तालाब के पानी में बढ़ते प्रदूषण और मृत मछलियों के कारण आसपास का वातावरण भी प्रभावित हो रहा है। उनका मानना है कि यदि समय रहते मछलियों की मौत के वास्तविक कारणों का पता नहीं लगाया गया तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है, जिससे पूरे जलाशय का पारिस्थितिक संतुलन प्रभावित होने की आशंका है।
समाजसेवी गुड्डू ने बताया कि इस संबंध में कई बार तालाब की देखरेख करने वाली संस्था को शिकायत दी गई, लेकिन हर बार उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया। उनका आरोप है कि संबंधित संस्था समस्या के अस्तित्व से ही इनकार करती रही है, जबकि प्रतिदिन बड़ी संख्या में मछलियां मर रही हैं। उन्होंने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री जनसंपर्क कार्यालय को भी लिखित शिकायत भेजी गई है, ताकि संबंधित विभाग इस ओर ध्यान देकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। इसके बावजूद अभी तक न तो वैज्ञानिक जांच कराई गई है और न ही मछलियों की मौत के कारणों का खुलासा हो सका है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन, मत्स्य विभाग और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि संकुलधारा पोखरा के पानी की वैज्ञानिक जांच कराई जाए, मछलियों की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाए तथा जलाशय के संरक्षण के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो यह ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व का जलाशय गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना कर सकता है। साथ ही उन्होंने जलीय जीवों की सुरक्षा और तालाब के संरक्षण के लिए स्थायी कार्ययोजना बनाने की भी मांग की है।