डाफी में कलश यात्रा के साथ देवी भागवत कथा व शतचंडी महायज्ञ का शुभारंभ, जय माता दी के उद्घोष से गूंजा वातावरण 

डाफी क्षेत्र स्थित कमला आर्शीवाद वाटिका में नौ दिवसीय संगीतमय श्रीमद् देवी भागवत कथा एवं शतचंडी महायज्ञ का शुभारंभ रविवार को भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। आयोजन की शुरुआत चौरा माता मंदिर से निकली विशाल कलश यात्रा के साथ हुई, जिसने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण में रंग दिया।
 

वाराणसी। डाफी क्षेत्र स्थित कमला आर्शीवाद वाटिका में नौ दिवसीय संगीतमय श्रीमद् देवी भागवत कथा एवं शतचंडी महायज्ञ का शुभारंभ रविवार को भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। आयोजन की शुरुआत चौरा माता मंदिर से निकली विशाल कलश यात्रा के साथ हुई, जिसने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण में रंग दिया।

कलश यात्रा में सबसे आगे 108 कन्याएं सिर और हाथों में कलश धारण किए हुए चल रही थीं, जो भारतीय परंपरा और श्रद्धा का प्रतीक बनीं। उनके पीछे बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष भक्ति गीतों पर नृत्य करते और जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे। “हर-हर महादेव” और “जय माता दी” के उद्घोष से वातावरण गूंज उठा, जिससे पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ।

यह यात्रा चौरा माता मंदिर से विभिन्न मार्गों से होती हुई कमला आर्शीवाद वाटिका पहुंची, जहां मां आदिशक्ति की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ कथा का शुभारंभ किया गया। आयोजन के यजमान देवी भागवत की पवित्र पोथी को सिर पर धारण कर चल रहे थे, जो श्रद्धा और समर्पण का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहा था।

कथा के प्रथम दिन देवी उपासिका साध्वी गीताम्बा तीर्थ ने श्रीमद् देवी भागवत की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि देवी भागवत कथा का श्रवण करने से मनुष्य के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है तथा सभी प्रकार के कष्टों का निवारण होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से कथा के माध्यम से आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर होने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में देवी भागवत की पोथी की आरती की गई और उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया। नौ दिनों तक चलने वाले इस महायज्ञ और कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। आयोजन समिति के अनुसार, यह धार्मिक अनुष्ठान क्षेत्र में सुख-शांति और समृद्धि की कामना के साथ आयोजित किया जा रहा है।