प्राचीन श्री जगन्नाथ मंदिर के संरक्षण कार्य में बाधा पर विवाद, ट्रस्ट ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की उठाई मांग

अस्सी स्थित ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व के श्री जगन्नाथ मंदिर के जीर्णोद्धार और संरक्षण कार्य में कथित रूप से उत्पन्न की जा रही बाधाओं को लेकर मंदिर ट्रस्ट ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। ट्रस्ट के संरक्षक ट्रस्टी दीपक शापुरी ने प्रशासन को प्रार्थना पत्र सौंपकर मंदिर परिसर में चल रहे विकास एवं संरक्षण कार्य में व्यवधान डालने वाले लोगों के विरुद्ध तत्काल कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है।
 

वाराणसी। अस्सी स्थित ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व के श्री जगन्नाथ मंदिर के जीर्णोद्धार और संरक्षण कार्य में कथित रूप से उत्पन्न की जा रही बाधाओं को लेकर मंदिर ट्रस्ट ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। ट्रस्ट के संरक्षक ट्रस्टी दीपक शापुरी ने प्रशासन को प्रार्थना पत्र सौंपकर मंदिर परिसर में चल रहे विकास एवं संरक्षण कार्य में व्यवधान डालने वाले लोगों के विरुद्ध तत्काल कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है।

दीपक शापुरी ने बताया कि श्री जगन्नाथ मंदिर वाराणसी की प्रमुख धार्मिक धरोहरों में से एक है। मंदिर का निर्माण लगभग वर्ष 1780 से 1790 के बीच उनके पूर्वज परम श्रद्धेय पंडित बेनी राम जी और विशंभर पंडित जी द्वारा कराया गया था। तब से लेकर अब तक उनका परिवार मंदिर की धार्मिक परंपराओं, पूजा-अर्चना और विश्वप्रसिद्ध श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव के संचालन एवं संरक्षण की जिम्मेदारी निभाता आ रहा है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 1989 में न्यायालय में विचारित वाद “कल्याण कृष्ण भानुशंकर बनाम राव प्रहलाद दास शापुरी एवं अन्य” में पारित आदेश के अनुसार मंदिर का संचालन एक सार्वजनिक ट्रस्ट के माध्यम से किया जा रहा है। वर्तमान समय में मंदिर परिसर के संरक्षण, जीर्णोद्धार और सौंदर्याकरण का कार्य ट्रस्ट की सर्वसम्मति से गठित समिति की निगरानी में चल रहा है। इस समिति के अध्यक्ष बृजेश सिंह तथा सचिव शैलेश त्रिपाठी हैं।

ट्रस्ट की ओर से प्रशासन को दिए गए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि कुछ अवैध कब्जाधारक और असामाजिक तत्व मंदिर परिसर पर अपना कब्जा बनाए रखने के उद्देश्य से चल रहे संरक्षण एवं सौंदर्याकरण कार्य में लगातार व्यवधान उत्पन्न कर रहे हैं। आरोप है कि ऐसे लोग विभिन्न उपद्रवपूर्ण गतिविधियों के माध्यम से न केवल मंदिर विकास कार्य को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि धार्मिक एवं जनहित से जुड़े प्रयासों में भी बाधा डाल रहे हैं।

मंदिर ट्रस्ट का कहना है कि यदि समय रहते इन गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई गई तो मंदिर के संरक्षण और विकास की योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए प्रशासन को मंदिर परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए अवैध कब्जाधारकों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।

ट्रस्ट ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि प्राचीन धार्मिक धरोहर के संरक्षण, सौंदर्याकरण और विकास कार्यों को निर्बाध रूप से पूरा कराने के लिए आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए तथा बाधा उत्पन्न करने वाले तत्वों के विरुद्ध कठोर कदम उठाए जाएं।