बीपी मंडल ने सामाजिक न्याय और समान प्रतिनिधित्व की लड़ाई को दी नई दिशा

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के छात्र अधिष्ठाता प्रेक्षागृह में सामाजिक न्याय के प्रखर पुरोधा और मंडल आयोग के अध्यक्ष स्वर्गीय बी. पी. मंडल की जयंती सामाजिक न्याय, समान अवसर और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के संकल्प के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने बी. पी. मंडल के सामाजिक एवं राजनीतिक योगदान को याद करते हुए उनके विचारों को वर्तमान दौर में भी प्रासंगिक बताया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
 

वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के छात्र अधिष्ठाता प्रेक्षागृह में सामाजिक न्याय के प्रखर पुरोधा और मंडल आयोग के अध्यक्ष स्वर्गीय बी. पी. मंडल की जयंती सामाजिक न्याय, समान अवसर और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के संकल्प के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने बी. पी. मंडल के सामाजिक एवं राजनीतिक योगदान को याद करते हुए उनके विचारों को वर्तमान दौर में भी प्रासंगिक बताया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

वक्ताओं ने कहा कि बी. पी. मंडल ने राजनीति को केवल सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं माना, बल्कि सामाजिक बराबरी, वंचित वर्गों के अधिकार और समान प्रतिनिधित्व को लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बनाया। मंडल आयोग की सिफारिशों ने देश में सामाजिक प्रतिनिधित्व और अवसर की समानता को लेकर व्यापक विमर्श खड़ा किया तथा पिछड़े और वंचित वर्गों के अधिकारों की आवाज को मजबूती दी।

डॉ. विंध्याचल ने दैनिक जीवन के उदाहरणों के माध्यम से विश्वविद्यालयों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद जातिगत भेदभाव तथा राजनीतिक और आर्थिक वर्चस्व की स्थितियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भाषा, संस्कृति और धार्मिक प्रतीकों के माध्यम से प्रभुत्व कायम करने की प्रवृत्तियों को समझना और इनके प्रति सामाजिक चेतना विकसित करना जरूरी है।

हिंदी विभाग की डॉ. प्रियंका सोनकर ने कहा कि ओबीसी, एससी, एसटी और अल्पसंख्यक समुदायों को अपने राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक प्रतिनिधित्व को मजबूत करने के साथ सांस्कृतिक विरासत और पहचान के संरक्षण पर भी ध्यान देना चाहिए। विधि संकाय के डॉ. प्रदीप कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में सामाजिक एवं राजनीतिक परिस्थितियों को समझते हुए जातिगत भेदभाव और आर्थिक वर्चस्व के सवालों पर गंभीर विमर्श आवश्यक है। उन्होंने सामाजिक चेतना को लोकतांत्रिक बदलाव का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

आईआईटी-बीएचयू के डॉ. केशव प्रसाद ने कहा कि बी. पी. मंडल का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे बढ़ने का समान अवसर उपलब्ध कराना था। उनकी विचारधारा और सामाजिक न्याय का संदेश नई पीढ़ी तक पहुंचाना आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। राजनीति विज्ञान के डॉ. अँजय्या संधू ने कहा कि बी. पी. मंडल ने सामाजिक बराबरी और राजनीतिक भागीदारी की दिशा में महत्वपूर्ण मार्ग दिखाया। डॉ. अमरनाथ पासवान ने कहा कि उन्होंने पिछड़े और वंचित समाज को अधिकार एवं सम्मान की लड़ाई के लिए नई ताकत दी।

वक्ताओं ने कहा कि बी. पी. मंडल की जयंती मनाने का वास्तविक उद्देश्य शिक्षा, रोजगार, सत्ता में भागीदारी, सामाजिक सम्मान और समान अवसर की लड़ाई को आगे बढ़ाना है। कार्यक्रम के मुख्य संयोजक एवं व्यवस्थापक इकाई अध्यक्ष हिमांशु यादव के नेतृत्व में सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने सामाजिक न्याय, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। कार्यक्रम का समापन समाज के प्रत्येक वंचित वर्ग को समान अधिकार और अवसर दिलाने के संकल्प के साथ हुआ।