बीएचयू के पूर्व छात्र डॉ. ब्रजेश तिवारी यूजीसी की पीएचडी गुणवत्ता जांच समिति में शामिल, शोध मानकों की करेंगे समीक्षा

बीएचयू के पूर्व छात्र एवं कबीर नगर निवासी डॉ. ब्रजेश कुमार तिवारी को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देशभर में पीएचडी उपाधियों की गुणवत्ता और शोध मानकों के अनुपालन की समीक्षा के लिए गठित विशेषज्ञ समिति का सदस्य नामित किया है। यह समिति विश्वविद्यालयों में पीएचडी से संबंधित प्रक्रियाओं का परीक्षण कर यह सुनिश्चित करेगी कि यूजीसी द्वारा निर्धारित मानकों का पालन किया गया है या नहीं।
 

वाराणसी। बीएचयू के पूर्व छात्र एवं कबीर नगर निवासी डॉ. ब्रजेश कुमार तिवारी को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देशभर में पीएचडी उपाधियों की गुणवत्ता और शोध मानकों के अनुपालन की समीक्षा के लिए गठित विशेषज्ञ समिति का सदस्य नामित किया है। यह समिति विश्वविद्यालयों में पीएचडी से संबंधित प्रक्रियाओं का परीक्षण कर यह सुनिश्चित करेगी कि यूजीसी द्वारा निर्धारित मानकों का पालन किया गया है या नहीं।

यूजीसी द्वारा गठित इस राष्ट्रीय स्तर की विशेषज्ञ समिति में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों से कुल 15 विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। डॉ. तिवारी वर्तमान में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), नई दिल्ली के अटल बिहारी वाजपेयी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।

यूजीसी को विभिन्न विश्वविद्यालयों में पीएचडी उपाधियों की गुणवत्ता तथा निर्धारित नियमों के उल्लंघन से संबंधित कई शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने वर्ष 2009 से 2025 के बीच विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा प्रदान की गई पीएचडी उपाधियों से संबंधित सूचनाएं और आंकड़े एकत्र किए हैं। इन्हीं अभिलेखों के विश्लेषण, परीक्षण और सत्यापन के लिए विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है।

समिति यह समीक्षा करेगी कि संबंधित विश्वविद्यालयों ने पीएचडी में प्रवेश प्रक्रिया, शोध निर्देशन, शोध प्रबंध के मूल्यांकन तथा उपाधि प्रदान करने की पूरी प्रक्रिया में यूजीसी के न्यूनतम मानकों और निर्धारित नियमों का पालन किया है या नहीं। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कदम भी उठाए जा सकते हैं। यूजीसी ने डॉ. ब्रजेश कुमार तिवारी से समिति की सदस्यता स्वीकार कर देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में शोध की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के इस महत्वपूर्ण दायित्व में योगदान देने का अनुरोध किया है।

डॉ. तिवारी ने स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी की शिक्षा काशी हिंदू विश्वविद्यालय से प्राप्त की है। बैंकिंग, वित्त, बैंक विलय, लेखांकन, उद्यमिता और सार्वजनिक नीति उनके प्रमुख शोध एवं शिक्षण क्षेत्र हैं। उनके शोध कार्यों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है तथा उनके एक शोधपत्र का उल्लेख विश्व बैंक भी कर चुका है। इसके अतिरिक्त उन्हें 'मेक इन इंडिया' विषय पर यूजीसी की पोस्ट डॉक्टोरल फेलोशिप भी प्राप्त हो चुकी है। शिक्षण और शोध के अलावा वे वित्तीय साक्षरता, उच्च शिक्षा सुधार, कौशल विकास, बैंकिंग तथा आर्थिक नीतियों से जुड़े विषयों पर नियमित लेखन और जनजागरुकता गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।