बसन्त पंचमी 23 जनवरी को, माँ सरस्वती की आराधना का श्रेष्ठ पुण्यकाल प्रातः 02:29 बजे से : प्रो. बिहारी लाल शर्मा

वाराणसी। विद्या, ज्ञान और वाणी की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती को समर्पित बसन्त पंचमी का पावन पर्व इस वर्ष गुरुवार, 23 जनवरी 2026 को पूरे श्रद्धा और विधि-विधान के साथ मनाया जाएगा। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने जन-सामान्य को बसन्त पंचमी के पुण्यकाल, तिथि और शुभ मुहूर्त की जानकारी देते हुए इस दिन को ज्ञान-साधना और विद्यारम्भ के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है।
 

वाराणसी। विद्या, ज्ञान और वाणी की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती को समर्पित बसन्त पंचमी का पावन पर्व इस वर्ष गुरुवार, 23 जनवरी 2026 को पूरे श्रद्धा और विधि-विधान के साथ मनाया जाएगा। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने जन-सामान्य को बसन्त पंचमी के पुण्यकाल, तिथि और शुभ मुहूर्त की जानकारी देते हुए इस दिन को ज्ञान-साधना और विद्यारम्भ के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है।

प्रो. बिहारी लाल शर्मा, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति

23 जनवरी को ही मान्य होगी बसन्त पंचमी
कुलपति प्रो. शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रामाणिक पंचांगों, धर्मशास्त्रीय मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार माघ शुक्ल पंचमी तिथि का आरंभ 23 जनवरी 2026 की प्रातः 02:29 बजे होगा। यह तिथि 24 जनवरी 2026 की प्रातः 01:46 बजे तक प्रभावी रहेगी। इस प्रकार 23 जनवरी को पूरे दिन पंचमी तिथि विद्यमान रहेगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि शास्त्रीय सिद्धांत “तिथिं समनु प्राप्त उदयं याति भास्करः” के अनुसार जिस दिन पंचमी तिथि का सूर्योदय से संयोग होता है, वही दिन पर्व मनाने के लिए मान्य होता है। चूंकि 23 जनवरी को पंचमी तिथि सूर्योदय के समय उपस्थित रहेगी, इसलिए इसी दिन बसन्त पंचमी पर्व और श्रीसरस्वती पूजन किया जाएगा।

24 जनवरी की प्रातः तक भी रहेगा धार्मिक अनुष्ठानों का अवसर
प्रो. शर्मा ने बताया कि पंचमी तिथि मध्यरात्रि के बाद भी शेष रहने के कारण 24 जनवरी 2026 को सूर्योदय से पूर्व तक विद्यारम्भ, जप-तप, ज्ञान-दान और पूजन जैसे धार्मिक कर्म किए जा सकते हैं। यह समय विशेष रूप से विद्यार्थियों और साधकों के लिए लाभकारी माना गया है।

ज्योतिषीय संयोग बना रहे हैं पर्व को विशेष
ज्योतिषीय दृष्टि से इस वर्ष बसन्त पंचमी का पर्व विशेष फलदायी माना जा रहा है। कुलपति ने बताया कि इस दिन सूर्य मकर राशि में और चंद्रमा मीन राशि में स्थित रहेंगे। साथ ही पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र और शिव योग का शुभ संयोग बन रहा है, जो ज्ञान, विद्या, बुद्धि और रचनात्मकता के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

उन्होंने बताया कि 23 जनवरी को प्रातः 07:56 बजे से अपराह्न 01:59 बजे तक का समय श्रीसरस्वती पूजन, विद्यारम्भ और बौद्धिक साधना के लिए सर्वोत्तम मुहूर्त रहेगा।

बसन्त पंचमी: ज्ञान और नवचेतना का प्रतीक
प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि बसन्त पंचमी भारतीय संस्कृति में केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि ऋतु परिवर्तन, नवचेतना, सृजनशीलता, कला और बौद्धिक जागरण का प्रतीक है। यह दिन विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधार्थियों और साधकों के लिए विशेष रूप से कल्याणकारी माना गया है। इसी अवसर पर देशभर के शिक्षण संस्थानों, विद्यालयों और सांस्कृतिक संगठनों में धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

श्रद्धा और ज्ञान-साधना के साथ पर्व मनाने की अपील
अंत में कुलपति प्रो. शर्मा ने जन-सामान्य से अपील की कि वे निर्धारित तिथि, पुण्यकाल और शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए माँ सरस्वती की आराधना करें और बसन्त पंचमी पर्व को श्रद्धा, शांति, उल्लास और ज्ञान-साधना के भाव के साथ मनाएं।