बीएचयू में प्रो. बृजभूषण ओझा प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग, एनएसयूआई ने कुलसचिव को सौंपा ज्ञापन

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की एनएसयूआई (NSUI) इकाई ने संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान (एसवीडीवी) संकाय के प्रोफेसर डॉ. बृज भूषण ओझा से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। शुक्रवार को संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय के कुलसचिव को ज्ञापन सौंपते हुए पूरे मामले की पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने का आग्रह किया। संगठन का कहना है कि हाल के दिनों में विभिन्न समाचार माध्यमों, सोशल मीडिया और एक छात्र द्वारा सार्वजनिक रूप से लगाए गए आरोपों के कारण विश्वविद्यालय की छवि प्रभावित हुई है, इसलिए तथ्यों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
 

वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की एनएसयूआई (NSUI) इकाई ने संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान (एसवीडीवी) संकाय के प्रोफेसर डॉ. बृज भूषण ओझा से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। शुक्रवार को संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय के कुलसचिव को ज्ञापन सौंपते हुए पूरे मामले की पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने का आग्रह किया। संगठन का कहना है कि हाल के दिनों में विभिन्न समाचार माध्यमों, सोशल मीडिया और एक छात्र द्वारा सार्वजनिक रूप से लगाए गए आरोपों के कारण विश्वविद्यालय की छवि प्रभावित हुई है, इसलिए तथ्यों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

एनएसयूआई बीएचयू इकाई के अध्यक्ष मुरारी यादव के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर प्रसारित जानकारी के अनुसार प्रो. डॉ. बृज भूषण ओझा पर नौकरी दिलाने के नाम पर कथित आर्थिक लेन-देन और ठगी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। संगठन का कहना है कि इन आरोपों की सत्यता की पुष्टि निष्पक्ष जांच के बाद ही हो सकती है, इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन को बिना किसी पूर्वाग्रह के पूरे प्रकरण की जांच करानी चाहिए।

ज्ञापन में मांग की गई है कि जांच के लिए विश्वविद्यालय से स्वतंत्र एक उच्चस्तरीय और निष्पक्ष समिति गठित की जाए, ताकि जांच प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष रह सके। साथ ही संगठन ने यह भी आग्रह किया है कि जांच पूरी होने तक संबंधित प्रोफेसर को विश्वविद्यालय के सभी प्रशासनिक एवं अन्य जिम्मेदार पदों से अलग रखा जाए, जिससे जांच पर किसी प्रकार का प्रभाव या हस्तक्षेप न पड़ सके।

एनएसयूआई ने अपने ज्ञापन में यह भी कहा है कि यदि संबंधित प्रोफेसर के खिलाफ पूर्व में भी किसी प्रकार की आधिकारिक शिकायतें या अभिलेख विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध हैं, तो उन्हें भी जांच के दायरे में शामिल किया जाए। संगठन का मानना है कि सभी उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों की समग्र समीक्षा से ही निष्पक्ष निष्कर्ष तक पहुंचा जा सकेगा।

संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मामले की शीघ्र जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि जांच के दौरान आरोप प्रमाणित होते हैं, तो विश्वविद्यालय के नियमों और अधिनियमों के तहत संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि विश्वविद्यालय की गरिमा और छात्रों का विश्वास दोनों कायम रह सकें।
 

एनएसयूआई नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि आरोपों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित कराना है। उनका कहना है कि सत्य सामने आने से न केवल विश्वविद्यालय की साख मजबूत होगी, बल्कि छात्रों और समाज का विश्वास भी कायम रहेगा। ज्ञापन सौंपने के दौरान अध्यक्ष मुरारी यादव के साथ आकाश, पीयूष वत्स, गुलशन, प्रिय दर्श मीणा, वैभव जायसवाल सहित एनएसयूआई के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।