IIT BHU और मध्य प्रदेश सरकार में हुआ अहम समझौता, 30 उच्च शिक्षण संस्थानों को मिलेगा अत्याधुनिक तकनीकी शिक्षा और शोध का लाभ

आईआईटी बीएचयू ने तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा देने की पहल करते हुए मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के माध्यम से विज्ञान, इंजीनियरिंग और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में दोनों संस्थान मिलकर काम करेंगे, जिससे मध्य प्रदेश के लगभग 30 उच्च शिक्षण संस्थानों को आईआईटी (बीएचयू) की विशेषज्ञता और अनुसंधान संसाधनों का लाभ मिलेगा।
 

वाराणसी। आईआईटी बीएचयू ने तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा देने की पहल करते हुए मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के माध्यम से विज्ञान, इंजीनियरिंग और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में दोनों संस्थान मिलकर काम करेंगे, जिससे मध्य प्रदेश के लगभग 30 उच्च शिक्षण संस्थानों को आईआईटी (बीएचयू) की विशेषज्ञता और अनुसंधान संसाधनों का लाभ मिलेगा।

भोपाल स्थित आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी में आयोजित समारोह में मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। आईआईटी (बीएचयू) की ओर से डीन (अनुसंधान एवं विकास) प्रो. राजेश कुमार तथा मध्य प्रदेश शासन की ओर से उच्च शिक्षा आयुक्त प्रबल सिपाहा ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर सेंटर फॉर इनोवेशन, इन्क्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (सीआईआईई) के समन्वयक प्रो. एम.के. मेश्राम, सहायक प्राध्यापक डॉ. विकास कुमार सहित दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

एमओयू के तहत मध्य प्रदेश के लगभग 30 उच्च शिक्षण संस्थानों, जिनमें आईआईटी, एनआईटी और विभिन्न विश्वविद्यालय शामिल हैं, को आईआईटी (बीएचयू) की शैक्षणिक विशेषज्ञता, अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, अनुसंधान सुविधाओं और नवाचार आधारित पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ने का अवसर मिलेगा। इसका उद्देश्य तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना, अनुसंधान की संस्कृति को मजबूत करना और विद्यार्थियों तथा शिक्षकों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के उद्देश्यों के अनुरूप कौशल विकास, उद्योग-अकादमिक सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

इस साझेदारी के अंतर्गत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर तकनीक, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्री-4.0 जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षण और शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इसके अलावा क्वांटम प्रौद्योगिकी, ड्रोन तकनीक, स्मार्ट सिटी, हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और अन्य उभरती तकनीकों पर प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम, फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी), कार्यशालाएं, बूट कैंप और प्रयोगशाला आधारित प्रशिक्षण भी आयोजित किए जाएंगे।
समझौते का एक महत्वपूर्ण पक्ष स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा देना भी है। आईआईटी (बीएचयू) का सेंटर फॉर इनोवेशन, इन्क्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (सीआईआईई) विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को तकनीकी मार्गदर्शन, इन्क्यूबेशन सुविधाएं, पेटेंट सहायता, तकनीकी हस्तांतरण और नवाचारों के व्यावसायीकरण में सहयोग प्रदान करेगा। इससे युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को अपने तकनीकी विचारों को सफल स्टार्टअप और उद्योगों में विकसित करने का अवसर मिलेगा।

एमओयू के तहत हरित ऊर्जा, हाइड्रोजन तकनीक, बैटरी तकनीक, ऊर्जा भंडारण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, स्मार्ट ग्रिड, उन्नत सामग्री, नैनो प्रौद्योगिकी और जलवायु-अनुकूल इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान को भी प्राथमिकता दी जाएगी। इससे मध्य प्रदेश के शोधार्थियों और शिक्षकों को आईआईटी (बीएचयू) के विशेषज्ञों के साथ मिलकर अत्याधुनिक शोध करने का अवसर मिलेगा और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तकनीकी समाधान विकसित किए जा सकेंगे।

आईआईटी (बीएचयू) के निदेशक प्रो. अमित पत्रा ने इस साझेदारी को देश में उच्च शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि संस्थान अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता और अनुसंधान क्षमता को व्यापक स्तर पर साझा करते हुए मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में नवाचार, उद्यमिता और तकनीकी शिक्षा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह सहयोग विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं के लिए नए अवसर सृजित करेगा तथा विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों की एक संयुक्त समन्वय समिति गठित की जाएगी, जो सभी शैक्षणिक, प्रशिक्षण, अनुसंधान और नवाचार संबंधी गतिविधियों की योजना, निगरानी और समीक्षा करेगी। यह एमओयू प्रारंभिक रूप से पांच वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा तथा आवश्यकता के अनुसार भविष्य में सहयोग के नए क्षेत्रों को भी इसमें शामिल किया जा सकेगा। यह समझौता तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान और उद्योग-अकादमिक सहयोग को नई गति देने के साथ-साथ देश के उच्च शिक्षा तंत्र को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।