जॉब पर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर आकाशवाणी वाराणसी ने नारी शक्ति को किया POSH अधिनियम पर जागरूक
वाराणसी। आकाशवाणी वाराणसी में महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा और समान अधिकारों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। कार्यस्थल पर महिलाओं के प्रति लैंगिक भेदभाव की रोकथाम, सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण के निर्माण और उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से “कार्यस्थल पर लैंगिक संवेदनशीलता (जेंडर सेंसिटाइजेशन)” विषय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला केंद्र के सभागार में केंद्राध्यक्ष स्वतंत्र सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें अधिकारियों, कर्मचारियों और कैजुअल प्रस्तोताओं ने भाग लिया।
महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्यस्थल संस्थान की प्राथमिकता: केंद्राध्यक्ष
कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर केंद्राध्यक्ष स्वतंत्र सिंह ने कहा कि किसी भी संस्थान की प्रगति तभी संभव है, जब वहां कार्यरत महिलाएं स्वयं को पूरी तरह सुरक्षित, सम्मानित और समान अवसरों से युक्त महसूस करें। उन्होंने कहा कि आधुनिक कार्यस्थल पर महिलाओं के प्रति संवेदनशील व्यवहार, समानता और सम्मान केवल नैतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि कानूनी और सामाजिक आवश्यकता भी है। इस प्रकार की कार्यशालाएं महिलाओं के अधिकारों को समझने और उन्हें व्यवहार में लागू करने में सहायक होती हैं।
लैंगिक संवेदनशीलता से महिलाओं को मिलता है आत्मविश्वास
कार्यशाला की मुख्य वक्ता डॉ. शम्भूनाथ सिंह रिसर्च फाउंडेशन, सोनिया (वाराणसी) की कार्यक्रम निदेशक डॉ. रोली सिंह रहीं। उन्होंने कहा कि लैंगिक संवेदनशीलता महिलाओं के आत्मविश्वास और मनोबल को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। कार्यस्थल पर भाषा, व्यवहार और संवाद की शैली में संवेदनशीलता अपनाकर महिलाओं के प्रति अनजाने में होने वाले भेदभाव को भी रोका जा सकता है।
POSH अधिनियम महिलाओं की सुरक्षा का मजबूत कानूनी आधार
डॉ. रोली सिंह ने महिलाओं के कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 यानी POSH Act की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह कानून कार्यस्थल पर महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान और न्याय सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है। उन्होंने शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया, समय-सीमा, गोपनीयता, आंतरिक शिकायत समिति की भूमिका और नियोक्ता व कर्मचारियों की जिम्मेदारियों को सरल भाषा में समझाया।
महिलाओं के अनुकूल माहौल से बढ़ती है कार्यकुशलता
उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए सुरक्षित और समावेशी कार्य-पर्यावरण न केवल उनके आत्मसम्मान को मजबूत करता है, बल्कि संस्थान की कार्यकुशलता, उत्पादकता और सामाजिक विश्वसनीयता को भी बढ़ाता है। POSH अधिनियम केवल दंडात्मक कानून नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को बढ़ावा देने वाला प्रभावी माध्यम है।
वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी रहे उपस्थित
कार्यशाला में कार्यक्रम प्रमुख अशोक पाण्डेय, सहायक निदेशक (कार्यक्रम) फुल्ल कुमार सिन्हा, उपनिदेशक (अभियांत्रिकी) अशोक कुमार सहित केंद्र के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी और कैजुअल प्रस्तोता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी और समयोचित बताया।
महिलाओं के सम्मान से ही सशक्त कार्य-संस्कृति
कार्यशाला का समग्र उद्देश्य आकाशवाणी वाराणसी में महिलाओं के प्रति सम्मान, सुरक्षा और संवेदनशीलता पर आधारित कार्य-संस्कृति को और अधिक मजबूत करना रहा। उपस्थित कर्मचारियों ने भविष्य में भी महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा से जुड़ी ऐसी जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यशालाओं के नियमित आयोजन की आवश्यकता पर जोर दिया।