नगर निगम की कार्रवाई के बाद बारिश में बेघर हुए डोम समाज के लोग, डीएम से तत्काल आवास उपलब्ध कराने को लगाई गुहार 

नदेसर क्षेत्र में नगर निगम की अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई के बाद डोम समाज के कई परिवारों के सामने आवास का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। डोम समाज फाउंडेशन (उत्तर प्रदेश) ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया है कि बिना पूर्व सूचना और बिना किसी वैकल्पिक पुनर्वास व्यवस्था के झोपड़ियों को हटाए जाने से दर्जनों परिवार बारिश के मौसम में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए हैं।
 

वाराणसी। नदेसर क्षेत्र में नगर निगम की अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई के बाद डोम समाज के कई परिवारों के सामने आवास का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। डोम समाज फाउंडेशन (उत्तर प्रदेश) ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया है कि बिना पूर्व सूचना और बिना किसी वैकल्पिक पुनर्वास व्यवस्था के झोपड़ियों को हटाए जाने से दर्जनों परिवार बारिश के मौसम में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए हैं।

फाउंडेशन के अनुसार, नदेसर स्थित खरबूजा शहीद तिराहा (दैनिक जागरण कार्यालय के सामने) क्षेत्र में लंबे समय से डोम समाज के लोग झोपड़ियां बनाकर निवास कर रहे थे। संस्था का आरोप है कि नगर निगम ने अचानक कार्रवाई करते हुए इन झोपड़ियों को हटा दिया, जबकि प्रभावित परिवारों को पहले से कोई नोटिस नहीं दिया गया और न ही उनके रहने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई।

ज्ञापन में कहा गया है कि वर्तमान समय में लगातार हो रही बारिश के कारण बेघर हुए परिवारों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो गई है। संस्था का कहना है कि जिन झोपड़ियों को हटाया गया, वही इन परिवारों का एकमात्र आश्रय थीं और अब उनके पास सिर छिपाने तक की जगह नहीं बची है।

डोम समाज फाउंडेशन के प्रदेश अध्यक्ष ने जिलाधिकारी से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया कि पात्र परिवारों को सरकारी आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे सुरक्षित वातावरण में अपना जीवनयापन कर सकें।

संस्था ने यह भी मांग की कि भविष्य में इस प्रकार की कार्रवाई से पहले प्रभावित लोगों को पर्याप्त समय दिया जाए तथा पुनर्वास की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। फाउंडेशन का कहना है कि विकास कार्यों के साथ-साथ गरीब और वंचित वर्ग के लोगों के अधिकारों एवं मानवीय आवश्यकताओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।