प्रख्यात कथावाचक प्रदीप मिश्रा की कथा सुनने उमड़ी भीड़, गेट बंद होने से काफी संख्या में कथा प्रेमी रह गए बाहर, लाउडस्पीकर लगाने की मांग
वाराणसी। बारिश के बीच भी कथा वाचक प्रदीप मिश्रा का प्रवचन सुनने के लिए श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। असि क्षेत्र स्थित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर परिसर के गोयनका भवन में इन दिनों प्रदीप मिश्रा की कथा चल रही है। सोशल मीडिया के माध्यम से कथा की जानकारी मिलने के बाद गुरुवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु और उनके अनुयायी कथा सुनने की उम्मीद लेकर यहां पहुंच गए। हालांकि, कथा स्थल वाले कैंपस का मुख्य द्वार बंद और ताला लगा होने के कारण बाहर से पहुंचे लोगों को प्रवेश नहीं मिल सका।
बारिश के बावजूद दर्जनों श्रद्धालु गोयनका भवन के बाहर पहुंचते रहे। इनमें महिलाएं और युवतियां भी शामिल थीं। लोगों को उम्मीद थी कि उन्हें कथा स्थल के अंदर जाकर प्रदीप मिश्रा का प्रवचन सुनने का अवसर मिलेगा, लेकिन परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं मिलने पर उन्हें बाहर ही रुकना पड़ा। कुछ समय तक श्रद्धालु बारिश के बीच प्रवेश मिलने की उम्मीद में मुख्य द्वार के आसपास खड़े रहे।
बाहर लाउडस्पीकर लगाने की मांग
कथा सुनने पहुंचे श्रद्धालुओं ने कहा कि यदि सुरक्षा या किसी अन्य कारण से आम लोगों को कथा स्थल के अंदर प्रवेश नहीं दिया जा रहा है तो बाहर लाउडस्पीकर की व्यवस्था की जानी चाहिए। इससे परिसर के बाहर मौजूद श्रद्धालु भी कथा सुन सकेंगे।
श्रद्धालुओं का कहना था कि वे दूर-दराज के क्षेत्रों से प्रदीप मिश्रा की कथा सुनने की इच्छा लेकर पहुंचे हैं। बारिश के बावजूद उनका उत्साह बना रहा, लेकिन कथा स्थल तक पहुंचने के बाद भी प्रवचन नहीं सुन पाने से उन्हें निराशा हुई।
सोशल मीडिया से मिली जानकारी
कथा सुनने पहुंचीं कुछ युवतियों ने बताया कि उन्हें सोशल मीडिया के जरिए जानकारी मिली कि सिद्धेश्वर महादेव मंदिर परिसर के गोयनका भवन में प्रदीप मिश्रा का कथा प्रवचन चल रहा है। उनकी कथाओं से प्रभावित होने के कारण वे बारिश के बीच यहां पहुंचीं, लेकिन कैंपस का गेट बंद होने के कारण अंदर जाने का मौका नहीं मिला। उन्होंने कहा कि प्रदीप मिश्रा को सामने से सुनने और देखने की उनकी इच्छा फिलहाल पूरी नहीं हो सकी, लेकिन भविष्य में अवसर मिलने पर वे दोबारा पहुंचेंगी।
बारिश में भी कायम रहा उत्साह
कथा स्थल के बाहर जुटे श्रद्धालुओं की मौजूदगी से प्रदीप मिश्रा की कथा को लेकर लोगों की उत्सुकता साफ नजर आई। कई लोग बारिश के बीच भी कुछ समय तक परिसर के बाहर खड़े रहे। उनका कहना था कि बाहर से कथा सुनने की व्यवस्था हो जाती तो उनकी यात्रा सार्थक हो जाती। फिलहाल गोयनका भवन परिसर में सीमित लोगों की मौजूदगी में कथा प्रवचन जारी रहा। वहीं, सोशल मीडिया के जरिए कथा की जानकारी फैलने के कारण आने वाले दिनों में भी श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना है।