हथुआ मार्केट में कंबोडिया के अंकोरवाट मंदिर की तर्ज पर बन रहा भव्य दुर्गा पूजा पंडाल, खमेर वास्तुकला की दिखेगी झलक
विश्वविख्यात ऐतिहासिक धरोहर को काशी में उतारने की तैयारी, मां दुर्गा के दर्शन के साथ रामायण-महाभारत के प्रसंगों से भी रूबरू होंगे श्रद्धालु
हर वर्ष देश-विदेश के प्रसिद्ध मंदिरों की प्रतिकृति तैयार कर आकर्षित करता है हथुआ मार्केट का पूजा पंडाल
रिपोर्ट - ओमकार नाथ
वाराणसी। धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में दुर्गा पूजा के दौरान आस्था के साथ कला और स्थापत्य का अनूठा संगम देखने को मिलता है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष हथुआ मार्केट में कंबोडिया के विश्वविख्यात अंकोरवाट मंदिर की तर्ज पर भव्य पंडाल तैयार किया जा रहा है। मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित होने के बाद यह पंडाल श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनने की उम्मीद है।
हथुआ मार्केट में हर वर्ष देश-विदेश के प्रसिद्ध मंदिरों और ऐतिहासिक स्थलों की शैली पर पंडाल बनाए जाते हैं। इस बार आयोजकों ने कंबोडिया की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को थीम बनाया है। पंडाल में अंगकोरवाट की स्थापत्य शैली और भव्य संरचना की झलक प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है। श्रद्धालु यहां मां दुर्गा के दर्शन-पूजन के साथ विदेशी मंदिर की वास्तुकला को भी करीब से देख सकेंगे।
12वीं शताब्दी में हुआ था मंदिर का निर्माण
कंबोडिया के सिएम रीप क्षेत्र में स्थित अंकोरवाट मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में खमेर साम्राज्य के राजा सूर्यवर्मन द्वितीय के शासनकाल में कराया गया था। मूल रूप से भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर बाद में बौद्ध आस्था का भी महत्वपूर्ण केंद्र बना। इसके पांच प्रमुख शिखर, विशाल परिसर और बारीक नक्काशी खमेर स्थापत्य कला की विशिष्ट पहचान हैं।
रामायण-महाभारत के प्रसंग हैं खास पहचान
अंकोरवाट की दीवारों पर रामायण, महाभारत और समुद्र मंथन जैसे पौराणिक प्रसंगों की कलात्मक नक्काशी देखने को मिलती है। यही विशेषताएं इसे भारतीय सांस्कृतिक प्रभाव की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर बनाती हैं। वर्ष 1992 में अंकोर को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था। मंदिर की आकृति कंबोडिया के राष्ट्रीय ध्वज पर भी अंकित है।