51 माहेश्वरी सखियों ने किए नौ गौरी के दर्शन, बाबा विश्वनाथ, काल भैरव, मां अन्नपूर्णा के दरबार में भी टेका मत्था
स्कूटी से मंदिरों तक पहुंचीं सखियां, सनातन परंपराओं के साथ सेल्फी लेकर संजोईं यादें, धार्मिक आयोजन में दिखा आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकजुटता का संगम
वाराणसी। धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में शारदीय नवरात्र के अवसर पर चारों ओर मां भगवती की आराधना और हर-हर महादेव के जयघोष गूंज रहे हैं। इसी भक्तिमय माहौल में माहेश्वरी कला संस्कृति, वाराणसी की युवा महिला शाखा की ओर से नौ गौरी और बाबा श्री काशी विश्वनाथ के दर्शन का धार्मिक आयोजन श्रद्धा और उल्लास के साथ किया गया। इसमें 51 माहेश्वरी सखियों ने काशी की प्राचीन धार्मिक परंपरा के अनुसार नौ गौरी के दर्शन किए। इसके साथ ही बाबा श्री काशी विश्वनाथ, बाबा काल भैरव, मां अन्नपूर्णा और मां गंगा के दरबार में मत्था टेककर परिवार, समाज और राष्ट्र की सुख-समृद्धि एवं कल्याण की कामना की।
दर्शन-पूजन के दौरान सखियां भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह से सराबोर नजर आईं। मंदिरों में दर्शन के दौरान हर-हर महादेव और जय माता दी के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा। नवरात्र में नौ गौरी के दर्शन की धार्मिक परंपरा के निर्वहन के साथ इस आयोजन ने काशी की आध्यात्मिक विरासत से जुड़ने का अवसर प्रदान किया।
पूजा चांडक के मार्गदर्शन में हुआ आयोजन
संस्था की अध्यक्षा पूजा चांडक, मंत्री राधिका डागा और कोषाध्यक्ष पूजा पटवारी के मार्गदर्शन में आयोजित इस धार्मिक यात्रा का नेतृत्व संयोजिका श्रुति जाजू ने किया। यात्रा से पहले होटल त्रिदेव में तनुश्री मुंदड़ा की ओर से चाय-कॉफी की व्यवस्था की गई। इसके बाद 51 सखियां स्कूटी से काशी के विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिरों के लिए रवाना हुईं। सभी ने श्रद्धापूर्वक दर्शन-पूजन कर धार्मिक परंपराओं के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।
आयोजन में महिला सहभागिता के साथ सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक चेतना की झलक भी देखने को मिली। सामूहिक रूप से मंदिरों में दर्शन करने से सखियों को एक-दूसरे के साथ समय बिताने और धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझने का अवसर मिला।
हर धाम पर सेल्फी लेकर संजोईं यादें
इस धार्मिक यात्रा की खास बात यह रही कि सखियों ने सनातन परंपराओं के निर्वहन के साथ आधुनिकता का भी सुंदर संगम प्रस्तुत किया। विभिन्न मंदिरों में दर्शन के बाद उन्होंने सेल्फी लेकर इन पलों को यादगार बनाया और आपस में साझा किया। इससे धार्मिक यात्रा केवल दर्शन-पूजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि आपसी आत्मीयता, मित्रता और सामूहिक स्मृतियों का भी माध्यम बनी।
रितु धूत के दिशा-निर्देशन में प्रचारमंत्री जया राठी, चंचल सारडा, निधि मुंदड़ा, सविता राठी, स्वाति बाहेती, खुशबू मारू, अमृता मुंद्रडा, श्रेया सोमानी, ज्योति झंवर, सलोनी लाखोटिया, खुशबू सहित अनेक सखियों ने आयोजन को व्यवस्थित और सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने का प्रयास
माहेश्वरी समाज के प्रचारमंत्री गौरव राठी ने बताया कि समाज धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए लगातार सक्रिय है। इसी क्रम में कुछ दिन पहले संगठन के प्रतिनिधिमंडल की ओर से वाराणसी में द्वादश ज्योतिर्लिंगों के सामूहिक दर्शन का आयोजन भी किया गया था। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही समाज में एकता, सद्भाव और सहयोग की भावना को भी मजबूत करते हैं।
काशी की पावन धरती पर नौ गौरी, बाबा विश्वनाथ और अन्य प्रमुख देवस्थलों के दर्शन सखियों के लिए श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से जुड़ने का अविस्मरणीय अनुभव बने। नवरात्र के भक्तिमय वातावरण में संपन्न इस आयोजन ने आस्था, संस्कार, संस्कृति और सामाजिक एकजुटता का संदेश दिया।