जेल में बंदियों के अधिकारों और व्यवस्थाओं से रूबरू हुए बीएचयू के विधि विद्यार्थी, 50 छात्र-छात्राओं ने जिला कारागार का किया शैक्षणिक भ्रमण
वाराणसी। बीएचयू के विधि संकाय के विद्यार्थियों ने शुक्रवार को जिला कारागार का शैक्षणिक भ्रमण कर जेल की व्यवस्थाओं और बंदियों के विधिक अधिकारों की जानकारी हासिल की। संकाय के लीगल एड क्लीनिक की ओर से आयोजित इस एक दिवसीय भ्रमण में चयनित 50 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान विद्यार्थियों ने कारागार की कार्यप्रणाली, बंदियों को मिलने वाली सुविधाओं और मानवाधिकारों के अनुपालन को नजदीक से समझा।
भ्रमण से पहले विधि संकाय परिसर में प्रेरक सत्र आयोजित किया गया। इसमें संकाय प्रमुख प्रो. प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि विधि की वास्तविक शिक्षा केवल पुस्तकों और न्यायालयों तक सीमित नहीं है। एक कुशल अधिवक्ता बनने के लिए सुधारात्मक संस्थाओं में मानवाधिकारों की जमीनी स्थिति को समझना भी जरूरी है। प्रो. एमके पाढ़ी ने कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली में कारागार का उद्देश्य प्रतिशोध नहीं, बल्कि बंदियों का सुधार और पुनर्वास होना चाहिए। विद्यार्थियों को जेल मैनुअल और बंदियों के विधिक अधिकारों का गंभीरता से अध्ययन करना चाहिए।
जिला कारागार पहुंचने पर उप-अधीक्षक ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। इसके बाद अधिकारियों ने विद्यार्थियों को बंदियों की भोजन, स्वास्थ्य और अन्य आधारभूत सुविधाओं के साथ उनके मौलिक एवं विधिक अधिकारों की जानकारी दी। संवाद सत्र में विद्यार्थियों ने त्वरित न्याय, मानवाधिकार और जेल मैनुअल से जुड़े सवाल पूछे।
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने पुरुष बंदी बैरकों का निरीक्षण कर रहन-सहन की व्यवस्था देखी। इसके अलावा आधुनिक रसोई में स्वच्छता और भोजन की गुणवत्ता, कारागार अस्पताल में चिकित्सा सुविधाओं तथा महिला बंदी वार्ड में महिला कैदियों के लिए उपलब्ध विशेष सुविधाओं और कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी ली। दल का नेतृत्व लीगल एड क्लीनिक के समन्वयक डॉ. सुरेंद्र मेहरा ने किया। इस अवसर पर अधिवक्ता अनंत अग्रवाल, प्रो. अंजली अग्रवाल, सुप्रिया सहित 50 विद्यार्थी मौजूद रहे।