44वें दीक्षांत महोत्सव की शुरुआत रचनात्मक रंगों के साथ, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित

सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में 44वें दीक्षांत महोत्सव के अंतर्गत गुरुवार को योग साधना केंद्र में चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों एवं संबद्ध महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। रंगों और कल्पनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति, प्रकृति, सामाजिक सरोकारों और सांस्कृतिक मूल्यों को अपनी चित्रकृतियों में सजीव रूप दिया। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में सृजनात्मकता, कलात्मक अभिव्यक्ति, सौंदर्यबोध तथा भारतीय सांस्कृतिक चेतना को प्रोत्साहित करना था।
 

वाराणसी। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में 44वें दीक्षांत महोत्सव के अंतर्गत गुरुवार को योग साधना केंद्र में चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों एवं संबद्ध महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। रंगों और कल्पनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति, प्रकृति, सामाजिक सरोकारों और सांस्कृतिक मूल्यों को अपनी चित्रकृतियों में सजीव रूप दिया। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में सृजनात्मकता, कलात्मक अभिव्यक्ति, सौंदर्यबोध तथा भारतीय सांस्कृतिक चेतना को प्रोत्साहित करना था।

कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में किया गया। उन्होंने प्रतियोगिता की अध्यक्षता करते हुए कहा कि चित्रकला केवल रंगों और रेखाओं का संयोजन नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति की कल्पनाशक्ति, संवेदनशीलता और रचनात्मक सोच की प्रभावी अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों की छिपी हुई प्रतिभाओं को सामने लाने का सशक्त माध्यम हैं और उनके व्यक्तित्व के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

कुलपति ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों में सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक उत्तरदायित्व और सृजनात्मक दृष्टिकोण का विकास भी होना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय भविष्य में भी साहित्यिक, सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियों का निरंतर आयोजन करता रहेगा, जिससे विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के पर्याप्त अवसर मिलते रहें।

कार्यक्रम की समन्वयक प्रो. विद्या कुमारी चंद्रा ने कहा कि चित्रकला विद्यार्थियों की भावनाओं, विचारों और कल्पनाशक्ति को अभिव्यक्त करने का प्रभावी माध्यम है। ऐसी प्रतियोगिताएं उनमें मौलिक चिंतन, कलात्मक दक्षता और आत्मविश्वास का विकास करती हैं। उन्होंने बताया कि 44वें दीक्षांत महोत्सव के अंतर्गत आयोजित विभिन्न शैक्षणिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं रचनात्मक कार्यक्रम विद्यार्थियों के बहुआयामी व्यक्तित्व निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।


प्रतियोगिता के सफल संचालन एवं संयोजन की जिम्मेदारी डॉ. रविशंकर पाण्डेय, डॉ. सत्येन्द्र कुमार यादव और डॉ. ज्ञानेन्द्र सापकोटा ने निभाई। कार्यक्रम के समापन पर डॉ. रविशंकर पाण्डेय एवं डॉ. सत्येन्द्र कुमार यादव ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, प्रतिभागियों तथा आयोजन समिति के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर डॉ. नितिन आर्य, डॉ. सुमीता, डॉ. पासांग, डॉ. अर्पिता सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में मौजूद विद्यार्थियों ने प्रतियोगिता में प्रस्तुत चित्रों का अवलोकन किया।